इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2015 की पुलिस भर्ती परीक्षा पर लगी रोक को हटाते हुए लिखित परीक्षा बगैर मेरिट के आधार पर हुई भर्ती को वैध करार दिया है. हाईकोर्ट ने पुलिस और पीएसी सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं एक साथ सुनवाई के बाद खारिज कर दी. इसके साथ ही 34, 716 सिपाहियों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है. याचिकाओं में दिसम्बर 2015 में जारी विज्ञापन के तहत बिना लिखित परीक्षा के भर्ती करने के नियम को चुनौती दी गई थी.
चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस सुनीत कुमार की पीठ ने कहा कि बिना लिखित परीक्षा के सिपाहियों का चयन करने में कोई अवैधानिकता नहीं है. रणविजय सिंह व दर्जनों अन्य की याचिकाओं पर चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस सुनीत कुमार की पीठ ने फैसला दिया.
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि 2015 में प्रदेश सरकार ने प्रारंभिक लिखित और मुख्य लिखित परीक्षा के अलावा शारीरिक दक्षता व मेडिकल परिक्षण का नियम बदलते हुए भर्ती हाईस्कूल व इंटर के अंक के आधार पर करने का निर्णय लिया था. इससे योग्य सिपाहियों का चयन नहीं हो पाएगा. जिसके बाद हाईकोर्ट ने चयन परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी. सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलील दी कि सिर्फ लिखित परीक्षा का प्रावधान समाप्त किया गया है. शारीरिक दक्षता के मानकों में कोई कटौती नहीं की गई है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रमुख सचिव गृह अरविन्द कुमार ने बताया कि सरकार इस मामले में कोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील नहीं करेगी. भर्ती परक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. ट्रेनिंग सेंटर खाली पड़े हैं. जल्द ही परिणाम जारी कर नए सिपाहियों की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी.
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