आज का बयान हज़रत उमर के तीन अजीब सवाल जिनके हज़रत अली ने अजीब जवाब दिए हैं इसके पहले एक हदीस सुन ले कि मुहम्मद सल्लाo की दुआ की बरकत से हज़रत अली को हर किस्म की बिमारियों से महफूज़ कर दिया था हज़रत अली रजीo इरशाद फरमाते हैं कि एक दफा मैं बीमार हुआ तो नबी करीम सल्लाo की खिदमत में हाज़िर हुआ आप सल्लाo ने मुझे अपनी जगह पर बिठाया और खुद खड़े होकर नमाज़ शुरू फार्म दी और अपने कपड़े का एक किनारा मेरे ऊपर डाल दिया फिर नमाज़ से फारिग होने के बाद इरशाद फ़रमाया कि ऐ अली अब तुम ठीक हो गए हो कोई फ़िक्र न करो.
मैंने जो चीज़ भी अल्लाह रब्बुल इज्ज़त से अपने लिए मांगी उस जैसी चीज़ मैंने अल्लाह रब्बुल इज्ज़त से मैंने तुम्हारे लिए भी मांगी है और मैंने जो भी अल्लाह से माँगा है वो अल्लाह ने मुझे ज़रूर अता फ़रमाया है बस इतनी बात है कि मुझसे यूँ कहा गया है कि आपके बाद कोई नबी नहीं होगा यानी नबी तो नहीं लेकिन आपको बुलंद तरीन मकाम अल्लाह ज़रूर अता फरमाएगा.
चुनांचे हज़रत अली फरमाते हैं कि जब मैं वहां से उठा तो मैं एकदम ठीक हो गया था जैसे मुझे कोई बीमारी ही नहीं थी ये अल्लाह के नबी की दुआ की बरकत थी और अल्लाह ने हज़रत अली को ऐसी सलाहियत अता फरमाई थी कि कोई भी जिस किस्म का भी पेचीदा मसला होता था उसे हज़रत अली हल कर देते थे बहरहाल हज़रत उमर ने ये इरशाद फ़रमाया है कि अगर अली न होता तो उमर हलाक हो जाता.
यानी बाज़ ऐसे मसाइल थे कि हज़रत उमर रजीo की राय दूसरी थी लेकिन फ़ौरन ही हज़रत अली ने इरशाद फ़रमाया कि इस मसले का हल ये है तो हज़रत उमर ने उस बात को सही तस्लीम फ़रमाया बहरहाल आज जो तीन सवाल का ज़िक्र है वो हज़रत उमर रजी के ज़ेहन में खटक रहे थे तो उन्होंने हजरत अली रजीo का इंतेखाब किया कि इन सवालों के जवाब हजरत अली से लेने चाहिए … आगे देखिये विडियो.
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