बलिया चुनाव में वोटों की खरीद-फरोख्त को लेकर सरकार पर बरसे पूर्व विधायक, कही ये बड़ी बात

बलिया। पैसा और शराब बांटकर चुनाव जीतना भारत में बड़ी बीमारी है, जो साल दर साल बढ़ती जा रही है। एक कहावत राजनैतिक गलियारों के लिए फिट बैठती है कि वोटों के गणित के साथ नोटों का गणित भी प्रत्याशी को आना चाहिए, ताकि वो समझ सके कि कितने नोट उड़ाने पर एक वोट खरीदा जा सकता है। वर्तमान दौर में हर राजनैतिक पार्टियां जनता के काम कर उनका दिल जीतने से ज्यादा पैसा फेंक कर वोट खरीदने में ज्यादा विश्वास रखती है। हाल ही में बलिया में हुए पंचायत चुनाव में वोटों की खरीद-फरोख्त के कई किस्से सामने आए।

हिंसा, नारी के अपमान और शब्दों की सीमा लांघने तक से जनप्रतिनिधियों ने गुरेज नहीं किया। अब इन घटनाओं को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह अपनी ही सरकार और संगठन पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि हमने शास्त्रों में द्रौपदी के चीर हरण के बारे में पढ़ा था, चुनाव में लखीमपुर खीरी में एक नारी का चीरहरण हो रहा था। प्रशासन नपुंसक होकर देख रहा था। यह कैसा लोकतंत्र है। लोकतंत्र पर कालिख है, सरकार को माफी मांगनी चाहिए। गाय-भैंस की तरह वोट खरीदना लोकतंत्र पर कलंक है।

पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार और संगठनों के लोग वोटों की बोली लगा रहे हैं। क्या इसी दिन के लिए हमारे क्रांतिकारियों ने शहादत दी थी। डीएम-एसपी बदमाशों की तरह वोट छीन रहे हैं। बलिया में छह फर्जी वोट पकड़े गए, उन्हें कोतवाली भेज दिया गया। फिर छोड़ दिया गया। दूसरे का वोट देना अपराध है। ताकत का उपयोग ऐसा होना चाहिए कि जनता भय मुक्त होकर चुनाव करें। राजनैतिक दलों का नैतिक पतन हो चुका है। ये नेता नए कार्यकर्ता बनाते हैं। उनके दिमाग में राष्ट्रवाद का जहर घोलते हैं।

इन नेताओं ने अपना असली चेहरा पंचायत चुनाव में सामने ला दिया है। पिता की मर्यादा का ख्याल पुत्र नहीं कर पा रहा। धोखाधड़ी के आरोपी के यहां दरबार लगा कर भोजन चख रहा है, जबकि झोपड़ी पर ही कभी दरबार लगता था।बहरहाल अपनी ही पार्टी पर बरसने के बाद पूर्व विधायक विवादों में घिर सकते हैं लेकिन उनके बयान साफ तौर पर हकीकत को बयां कर रहे हैं।

Rashi Srivastav

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