बलिया। बलिया में हुए खाद्यान्न घोटाले में शुक्रवार को तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख प्रभुनाथ पटेल, तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तुलसी राम और तत्कालीन कोटेदार ऋषभदेव सिंह को गिरफ्तार प्रदेश पुलिस की आर्थक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने किया। यह गिरफ्तारी मुकदमा दर्ज होने के करीब 15 वर्षों बाद हुई है। घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम कर रही है।
2002 से 2005 के बीच हुआ था घोटाला
यह घोटाला वर्ष 2002 से 2005 के बीच हुआ था। जांच में पता चला कि बलिया जिले के मनियर ब्लॉक में लगभग 50 लाख रुपये का गबन कर लिया गया था। इसमें 20 लाख रुपये के सरकारी धन और लगभग 30 लाख रुपये कीमत का खाद्यान्न शामिल था। ईओडब्ल्यू के डीजी डॉ. राजेन्द्र पाल सिंह ने इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया था। इस पर ईओडब्ल्यू वाराणसी सेक्टर के एसपी डी. प्रदीप कुमार ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए दो टीमों का गठन किया। शुक्रवार को तीनों को बलिया के मनियर थाना क्षेत्र से स्थानीय पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों के विरुद्ध वर्ष 2006 में आईपीसी की धारा-409, 420, 467, 471, 477 ए, 120-बी व 34 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
योजना में गांवों में कराए गए थे विकास कार्य
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत जिले के विभिन्न गांवों में मिट्टी, नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, पटरी मरम्मत, संपर्क मार्ग और पुलिया निर्माण का कार्य कराया गया था। इसमें काम करने वाले श्रमिकों को श्रम के बदले खाद्यान्न और नकद पैसे दिए जाने का निर्देश था। जांच में पता चला कि जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा ब्लॉक प्रमुख एवं कोटेदारों से मिलीभगत करके फर्जी मस्टररोल, पेमेंट आर्डर व खाद्यान्न वितरण में कूटरचना करके घोटाला किया गया। जांच में श्रमिकों के नाम व पते फर्जी पाए गए।
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