रेलवे ने शनिवार को बलिया व वाराणसी के बीच बिजली से चलने वाली पहली रेल इंजन का ट्रायल किया गया। हालांकि ट्रेनों का परिचालन शुरू होने में अभी दो सप्ताह का समय लगने की उम्मीद है। विभाग ने विद्युतीकरण का काम लगभग पूरा कर लिया। मार्ग में आने वाली छोटी-छोटी कमियों को दूर करने के बाद जिले से गुजरने वाली ट्रेनों को बिजली से दौड़ाया जायेगा। विद्युत ट्रैक को फाइनल टच देने के लिए सीआरएस विभाग (गोरखपुर) की टीम पहुंची थी। टीम जांच-पड़ताल के बाद तकनीकी कमियों की रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजेगी।
बलिया से वाराणसी के बीच विद्युतीकरण का काम आखिरी चरण पर है। रेलवे की टीमों ने पिछले कुछ दिनों के अंदर हर मानकों की जांच की। इसके बाद शनिवार को शाम पहली विद्युत ट्रेन का ट्रायल किया गया।
तीन दिनों तक वाराणसी से बलिया के बीच विद्युतीकरण कार्य के सुरक्षा मापदंडों को परखने के बाद मुख्य सुरक्षा आयुक्त एसके पांडेय दोपहर करीब तीन बजे निरीक्षण यान से स्टेशन पहुंचे। इसके कुछ देर बाद यहां से बिजली पर दौड़ने वाली पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। कुछ तकनीकी गड़बड़ियां आने पर ट्रेन करीब दो घंटे तक रुकने के बाद जांच अधिकारियों टीम को लेकर शाम करीब छह बजे बनारस रवाना हो गई। पहली बिजली ट्रेन के रवाना होने से स्टेशन पर उत्साह का माहौल रहा।
इस दौरान विद्युत टीआरडी के सीनियर डी धर्मेंद्र यादव, मुख्य विद्युत इंजीनियर वीपीएन तिवारी, सहायक मंडल इंजीनियर वीरेन्द्र भारती, केपीटीएल के सीनियर इंजीनियर केके प्रधान , स्टेशन अधीक्षक संजय सिंह, स्टेशन मास्टर सुनील सिंह, बीरबल , आरपीएफ प्रभारी अमित राय, जीआरपी प्रभारी राजा भैया आदि थे।
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