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बलिया में खाद संकट, किसानों में आक्रोश, अधिकारी ने बताया कब मिलेगा खाद?

उत्तर प्रदेश में खाद की किल्लत पैदा हो गई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से खाद की कमी से परेशान किसानों की खबरें आ रही हैं। किसान खाद लेने के लिए लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं। खाद के लिए किसानों की मौत तक की बात सामने आ चुकी है। अब यही आफत बलिया जिले में दस्तक दे चुकी है। जिले के समितियों और पीसीएफ गोदामों पर खाद नहीं मिल रही है। जिसके चलते किसानों को दौड़ लगानी पड़ रही है।

बलिया जिले के किसानों को डीएपी खाद के लिए समितियों और पीसीएफ गोदामों का कई दिनों से चक्कर काटना पड़ रहा है। समितियों और पीसीएफ गोदामों पर ताला लटका हुआ है। जिसकी वजह से किसानों को निजी दुकानों से खाद खरीदना पड़ रहा है। जिले में खाद की किल्लत की वजह से दुकानों पर इनके भाव चढ़ गए हैं। खबरों के मुताबिक खाद वितरण केंद्रों पर इस बार ना ही डीएपी खाद मिली है और ना ही कोई बीज मिला है।

खाद नहीं होने के चलते किसान गेहूं की खेती शुरू नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में खाद और बीज रखे हुए। खाद और बीज का वितरण जल्द ही शुरू किया जाएगा। दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक चिलकहर ब्लॉक के बर्रेबोझ, सिकरिया, कुरेज, रामपुर, इंदरपुर, संवरा और ताखा समेत एक दर्जन समितियों और पीसीएफ केंद्रों से किसानों को मांग के अनुसार डीएपी खाद मिलती थी। पहले दस हजार बोरी डीएपी खाद और पंद्रह हजार बोरी यूरिया बांटी जाती थी। लेकिन इस बार किसी भी केंद्र से खाद और बीज नही मिली है।

किसानों का कहना है कि बीज और खाद ना मिलने की वजह से गेहूं की बोआई नहीं हो पा रही है। खेती समय से शुरू नहीं हुई तो आगे चलकर फसल प्रभावित होगी। कई दिनों तक खाद केंद्रों का चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल रहा है। दुकान से एनपीके खाद खरीदने पर ज्यादा रुपए देने पड़ते हैं। खाद की मुसीबत अब जिले में आंदोलन को आमंत्रण दे रही है। किसानों और अन्य लोगों में इसे लेकर रोष देखने को मिल रहा है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कालिका यादव ने कहा है कि जल्द ही डीएपी खाद किसानों को नहीं मिली तो सड़क जाम कर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

जिला कृषि अधिकारी विकास कुमार पटेल का बयान मीडिया में छपा है। उन्होंने कहा है कि “चिलकहर ब्लॉक के सभी केंद्रों पर रविवार तक डीएपी उपलब्ध हो जाएगी। खाद की कमी नहीं होगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि किसान अपनी जरूरत के हिसाब से ही खाद खरीदें।”

Akash Kumar

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