इजराइल और फलिस्तीन पिछले कई दशको से चल रहे संघर्ष में फ़लीस्तीन को एक बहुत बड़ी सफलता मिली है जिसमे उसे एक यूरोपीय देश का साथ मिल गया है और उस देश का नाम है आयरलैंड वहीँ ये इजराइल के लिए बिलकुल भी सही नहीं क्योंकि इजराइल को हमेशा यूरोप का साथ मिला है. अब आपको पूरा मामला बताते हैं दरअसल आयरलैंड के निचले सदन में फ़लीस्तीन में अवैध इजराइल के कारखानों और उत्पाद आयात और सेवाएँ प्राप्त करने पर प्रतिबन्ध का बिल बहुमत से मंज़ूर कर लिया गया है इस बारे में अलजज़ीरा ने बताते हुए कहा कि निचले सदन के सबसे बड़े विपक्षी दल रिपब्लिक पार्टी के सीनेटर नियाल कोलेंज ने बिल पेश किया जिसे बहुमत ने मंज़ूरी दे दी.
आपको बता दें कि इस बिल के पक्ष में 78 जबकि विरोध में 45 वोट पड़े आपको बता दें कि इस बिल का विरोध कई देश कर रहे थे जिसमे अमेरिका और इजराइल भी शामिल है लेकिन इसके बावजूद भी बिल इजराइल के विरोध में मंज़ूर कर लिया गया इस बिल का मकसद इजराइल द्वारा पश्चीमी किनारों पर हमले और अवैध उत्पादों की बिक्री पर और आयात पर प्रतिबन्ध लगाना था.
इस बिल को मंज़ूरी मिलने के बाद सीनेटर ने ट्वीट करके कहा कि आयरलैंड हमेशा अंर्तराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार के साथ खड़ा रहेगा और हम इतिहास रचने से एक कदम की दूरी पर हैं इस बारे में आपको बता दें कि ये बिल अब कई चरणों से गुज़र कर कानून का रूप ले लेगा और अगर ऐसा हो गया तो आयरलैंड इजराइल की फ़लीस्तीन पर की गयी कार्यवाही को अपराध करार देने वाला पहला यूरोपीय देश बन जायेगा.
इस पूरे मामले पर फ़लीस्तीन के वरिष्ठ अधिकारी मुस्तफा बरगूसी ने कहा कि ये हमारे लिए एक बड़ी सफलता है और निकट भविष्य में हमें कई और यूरोप के देशो का साथ मिलने कि आशा है आपको बता दें कि आयरलैंड के इस कदम का कई यूरोपीय देश विरोध भी कर रहे हैं.
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