बलिया – शहर कोतवाली पुलिस ने अनुसूचित जनजाति (गोंड) का फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरी कर रहे एक ही परिवार के नौ लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गयी है। कोर्ट ने मामले की विवेचना कर रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है।
बलिया- फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे एक ही परिवार के नौ लोगों पर केस दर्ज़
बांसडीह नगर के उत्तर टोला निवासी उमाशंकर सिंह ने आवेदन देकर आरोप लगाया था कि नगर के निवासी लल्लन राम व उनके परिवार के आठ सदस्य भड़भुजा जाति के हैं। इन सभी ने अनूसूचित जनजाति (गोंड) का प्रमाण पत्र बनवाकर स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी व अन्य विभागों में नौकरी हथिया ली है। आरोप के अनुसार लल्लन राम के पुत्र फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर जिला अस्पताल, जबकि दो पुत्र बांसडीह पीएचसी में नौकरी कर रहे हैं। इनके अलावा एक पुत्री फर्जी सर्टिफिकेट के ही आधार पर मऊ में आंगनबाड़ी में सुपरवाइजर की नौकरी कर रही है।
कोर्ट ने लिखा है कि उच्च न्यायलय ने आदेशित किया है कि बलिया जनपद में कोई भी गोंड जाति नहीं पायी जाती हैं। यहां भड़भुजा जाति के सदस्य पाये जाते हैं, जो पिछड़ी जाति के अर्न्तगत आते हैं। बलिया के तत्कालीन डीएम ने भी उच्च न्यायालय में अपना शपथ पत्र देकर इसकी पुष्टि भी की है।
लल्लन राम के पिता स्व. रामकृपाल राम ने पूर्व में अपनी कई जमीन की रजिस्ट्री व अन्य कागजातों में अपने को अनूसूचित जनजाति न होने तथा भड़भुजा जाति होने का उल्लेख किया है। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने लल्लन राम व उनके पुत्र राजेश कुमार, संजय कुमार, अजय कुमार, मनीष कुमार, पवन कुमार, लक्ष्मण प्रसाद, पुत्री चन्दा, बहू प्रेमलता के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468 के तहत मुकदमा कायम कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
बता दें की ऐसा पहली बार नहीं हुआ है , इससे पहले भी यूपी में कई जगह मामले सामने आया है ।
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