क्या बलिया में गलत रणनीति से हारी भाजपा?

बलिया। विगत 25 वर्षो में भाजपा के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने का यह एक सुनहरा अवसर था,जिसे भाजपा ने गंवा दिया। अपने लक्ष्य पर शुरुआत से ही ध्यान केंद्रित नहीं कर पाने के कारण आज भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के ही एक राजनैतिक सूत्र ने कहा यदि भाजपा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही पूरी तत्परता से लग गयी होती तो आज तस्वीर कुछ और होती। जिस प्रकार का साम-दाम, दंड-भेद भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने में लगाया यदि यही मुस्तैदी जिला पंचायत के वार्डों में दिखाई होती तो अधिक सीटें हासिल हो सकती थीं।

जब वार्ड नंबर 10 से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने चुनावी ताल ठोका, यदि भाजपा ने अपना ध्यान वहां केन्द्रीत किया होता तो आज देवेन्द्र यादव चुनाव जीत कर जिला पंचायत अध्यक्ष होते। लेकिन भाजपा को अपनी गलत रणनीति का खामियाजा हार के रुप में भुगतना पड़ा। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि भाजपा को अपने दल का प्रत्याशी नहीं मिला उसे सुभासपा के जिला पंचायत सदस्य पर भरोसा जताना पड़ा। सुप्रिया यादव को पार्टी में शामिल करने के बाद उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया गया। भाजपा का कमजोर पक्ष यह था कि,भाजपा से जिले में

कुल 58 जिला पंचायत सदस्य चुनाव मैदान में थे, जिसमें से करीब 7 नाम ही चुनाव जीतकर आए बाकी भाजपा समर्थित 49 प्रत्याशी हार गए। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए जिस तरीके से मंत्री उपेंद्र तिवारी, मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला, सांसद रविंद्र कुशवाहा, सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त,राज्यसभा सांसद नीरज शेखर,राज्यसभा सांसद सकलदीप राजभर, विधायक संजय यादव,विधायक सुरेंद्र सिंह पूरी तन्मयता के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुप्रिया यादव को जिताने में लगे हुए थे, लेकिन उनकी तमाम कोशिशें नाकामयाब साबित हुई। नतीजतन

भाजपा को सपा से शिकस्त खानी पड़ी। हालांकि सूत्रों की मानें तो भाजपा के सहयोगी के रूप में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की अहम भूमिका रही, यहां तक कि पूरे चुनाव संचालन में यदि भाजपा को 24 मत प्राप्त हुआ तो उसमें सबसे अधिक मत उमाशंकर सिंह के कड़ी मेहनत के बदौलत ही प्राप्त हुआ। अपनी तमाम दांव-पेंच से भाजपा को यह पूरी उम्मीद थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव भाजपा ही जितेगी। इसके लिए भाजपा ने सभी हथकंडे अपनाए, जिसमें समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी,नारद राय को निशाने में रखते हुए एसपी, डीएम से

मिलकर यह शिकायत करते रहे कि सपा के लोग जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण करके रखे हुए हैं। उन्हें मुक्त कराया जाए और उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया जाए। हालांकि कुछ सदस्य सपा के खेमे से बाहर निकला कर भाजपा का दामन शायद इसी भरोसे में थामा कि जीत भाजपा की ही होगी। लेकिन चुनाव परिणाम विपरीत आने से अब वो कहीं के नहीं रहे।

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