क्या ओवर कॉन्फिडेंस के कारण बलिया में 4 सीटें गंवा बैठी भाजपा ?

बलिया। उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी ने अपना झंडा गाड़ दिया, लेकिन पूर्वांचल के बलिया जिले में बीजेपी का प्रदर्शन काफी निशानाजनक देखने को मिल। विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी 7 में से सिर्फ 2 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई है। जबकि 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 7 में से 5 सीटों पर कब्जा किया था। 2017 की तुलना में 2022 के परिणाम के एक दम उलट हैं। जहां पिछली बार बीजेपी ने सिर्फ 2 सीट गंवाई थीं तो इस बार बीजेपी के हाथ सिर्फ 2 ही सीट लगी हैं।

बता दें 7 विधानसभा सीटों में से 4 सीटों पर सपा और 2 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली है और एक सीट पर बसपा ने कब्जा जमाया है। पिछले चुनाव नतीजों में मोदी लहर में बीजेपी का 7 सीटों में से 5 सीटों पर कब्जा था। बांसडीह सपा और रसड़ा सीट पर बसपा को मिली थी। इस बार 5 में से 4 सीटों को भाजपा ने खो दिया। लेकिन एक सीट बांसडीह को सपा से छिना है। वहीं सपा ने 4 सीटों की बढ़ोतरी की है। और एक सीट खोई है।

बीजेपी की हार की वजह- बीजेपी ने जिन 4 सीटों को खोया है। उन पर हार की वजह बीजेपी नेताओं के नजदीकियों को टिकट देना माना जा रहा है। जहां चुनावी सर्वे नजरअंदाज कर जिताऊ प्रत्याशियों को उपेक्षित किया गया है। 

अपनों को नाराज करना पड़ा महंगा-  बलिया सदर विधानसभा पर दयाशंकर सिंह की स्वच्छ छवि चुनाव जीतने में अच्छा असर डाला है। जिनसे किसी प्रकार की नाराजगी नहीं थी। वहीं फेफना विधानसभा से भी उपेंद्र तिवारी के प्रति भी कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी जिसके कारण सपा की वहां जीत हुई। हालांकि बेल्थरा रोड विधानसभा में बसपा से आए छट्टू राम को टिकट देना शायद वहां कार्यकर्ताओं की नाराजगी हो सकती है।

सपा के दिग्गज नेता हारे- विधानसभा बैरिया, बलिया सदर, फेफना, सिकंदरपुर, बेल्थरा रोड बीजेपी के खाते में थी। बांसडीह विधानसभा पर नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी सपा के टिकट पर और रसड़ा विधानसभा पर बसपा पूर्वांचल प्रभारी उमाशंकर सिंह काबिज थे। अबकी बार बांसडीह विधानसभा से नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी को हार का सामना करना पड़ा। यहां से भाजपा औक निषाद पार्टी की गठबंधन प्रत्याशी केतकी सिंह ने उन्हें हराया है। वहीं उमाशंकर सिंह तीसरी बार अपनी सीट पक्की कर लिए हैं।

Ritu Shahu

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