बलिया। सुदूर धनबाद के बहुचर्चित प्रमोद सिंह हत्याकाण्ड में संतोष सिंह- रणविजय सिंह समेत सभी आरोपी शुक्रवार 4 फरवरी, को बरी कर दिया गया। इस हत्याकांड प्राथमिकी में जिले के निवासी जनता मजदूर संघ के बाहुबली नेता रामधीर सिंह और राजीव रंजन को भी अभियुक्त बनाया गया था। यह वही रामधीर सिंह है जिनके बाहुबल की किवंदतीयां आज भी दबी ज़ुबान से ही सही, जिले में जिज्ञासा से सुनी सुनाई जाती हैं।
क्या है मामला- कोयला कारोबारी प्रमोद सिंह की हत्या तीन अक्टूबर 2003 को धनसार स्थित बीएम अग्रवाला कालोनी में गोली मारकर कर दी गई थी। प्रमोद सिंह के कथित बयान पर धनसार थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इस हत्याकांड के बाद अंडरवर्ल्ड में सनसनी फैल गई थी। प्राथमिकी में जनता मजदूर संघ के नेता रामधीर सिंह और राजीव रंजन को अभियुक्त बनाया गया था। बाद में अनुसंधान का जिम्मा सीबीआइ को सौंपा गया था। सीबीआइ की जांच में पुलिस की कहानी धवस्त हो गई थी।
रणविजय सिंह की ओर से बचाव पक्ष में दिल्ली के अधिवक्ता हरप्रीत सिंह होरा, गौरव पटेल और अभिषेक सिंह ने पैरवी की थी। ४ फरवरी २०२२ को सीबीआइ की विशेष अदालत के न्यायाधीश रजनीकांत पाठक ने कांड के आरोपित रणविजय सिंह, संतोष सिंह, अयूब खान, दारोगा एमपी खरवार, अरशद अली और हीरा खान को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इस दौरान दिल्ली के युवा अधिवक्ता गौरव पटेल, हरप्रीत और अभिषेक सिंह की पैरवी और उसके बाद आया यह फैसला चर्चा का कारण बना हुआ है। युवा अधिवक्ताओं के दलील के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रमोद सिंह की हत्या हुई पर किसने कराई और किसने की, सीबीआई यह साबित नहीं कर पाई।
तस्वीर: अधिवक्ता अभिषेक, गौरव, फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में रामधीर सिंह का किरदार निभाने वाले तिग्मांशु एवं अधिवक्ता हरप्रीत। साभार : सोशल मीडिया
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