सिकन्दरपुर सामुदायिक केंद्र में डाक्टरों की कमी, मरीज़ों को नहीं मिल पा रहा इलाज

सिकन्दरपुर डेस्क : सिकन्दरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा बहाल करने का दावा करती है। लेकिन वर्तमान में मात्र 3 चिकित्सक के भरोसे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा चलायी जा रही है।

जहां गंभीर अवस्था में पहुंचे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में रेफर कर दिया जाता है। हालांकि अस्पतालों को संसाधनों से लैस भी किया गया है। लेकिन यह महज अस्पताल की शोभा बढ़ा रही है। लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार के कई दावें है लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण लोग निजी अस्पताल एवं नर्सिग होम में इलाज कराने को विवश हैं।

सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर लाखों खर्च के बावजूद निजी अस्पतालों और चिकित्सकों की चांदी कट रही है।और निजी अस्पताल वाले लोगों को लूट रहें है वही स्वास्थ्य कर्मियों टोटा स्वास्थ व्यवस्था का मखौल उड़ा रहा है।तहसील स्तर पर मरीजों को इलाज के लिए चिकित्सक से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों का घोर अभाव सिकन्दरपुर के लोगों के लिए दुखदायी साबित हो रहा है।

ज्ञात हो कि डॉ अजय तिवारी के स्थानांतरण के बाद कोई बाल रोग विशेषज्ञ नही होने से नौनिहालों का इलाज मुश्किल हो गया हैं एवं अच्छे चिकित्सक के न होने से उनको निजी अस्पताल का सहारा रहता है जहाँ उनका आर्थिक शोषण होता है तथा जान भी जोखिम में रहती है ।

यही नही आपातकालीन स्थिति में छोटी बड़ी दुर्घटना में घायल लोगों को भी सीधा सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इससे दूर दराज के  लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।जिसका आलम यह है कि लोगों का आक्रोश फूटने लगा है।बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर अस्पताल पहुंचे लोगों को चिकित्सकों की कमी के कारण बैरंग लौटना पड़ता है। इसके कारण लोगों में आक्रोश गहराता जा रहा है।

सरकारी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर कई बार लोगों का आक्रोश फूट चुका है। लोगों ने इसको लेकर उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत भी किया। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुयी है। चिकित्सकों की कमी के कारण सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण इलाकों के लोगों को हो रही है। जिन्हे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए शहर के निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है।

लोगों का आरोप यह भी है कि चिकित्सको के कमी का लाभ दलाल उठा रहें है।अस्पताल परिसर में आएं लोगो को बरगला कर प्राइवेट नर्सिंग होम में ले कर जा मोटी कमीशन कमा रहें है एवं निजी अस्पताल के संचालक चांदी काट रहे हैं।जिन चिकित्सकों के सहारे अस्पताल चल रहा है वे बाहरी दवा एवं जांच लिख कर अपनी जेब भर रहें है।जिसको लेकर क्षेत्रिय लोगों में रोष व्याप्त है।
रिपोर्ट- अभिषेक तिवारी

बलिया ख़बर

Recent Posts

उत्सर्ग व गोंदिया एक्सप्रेस ठहराव पर खुशी, लंबित मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

फेफना (बलिया)। क्षेत्रीय संघर्ष समिति फेफना के नेतृत्व में शुक्रवार को क्षेत्रवासियों ने रेलवे बोर्ड…

10 hours ago

Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह…

4 days ago

4 days ago

UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय…

6 days ago

मकर संक्रांति पर टोंस तट पर सजा चिंतामणि ब्रह्म का ऐतिहासिक मेला, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

बलिया जिले की फेफना विधानसभा क्षेत्र के तीखा गांव में टोंस नदी तट पर स्थित…

2 weeks ago

BHU छात्र नेता योगेश योगी के प्रयास से एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को मिली मंजूरी!

बलिया। फेफना जंक्शन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर क्षेत्रवासियों की लंबे समय से…

2 weeks ago