बलिया में बसपा-भाजपा का याराना, कितनी हकीकत-कितना फसाना?

बलिया। बलिया में बसपा और भाजपा का याराना खूब चर्चा में है। चुनाव में दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी। अब चर्चा है कि आखिर इनकी दोस्ती कब तक टिक पाएगी। हम सभी जानते हैं राजनीति में दोस्ती शर्तों और समझौते से भरी होती है। राजनीति में दोस्त कभी स्थाई नहीं रहते। यह दोस्त कब एक दूसरे के दुश्मन बन जाएं, कोई कह नहीं सकता। चुनाव आते ही सियासी कुनबों में दोस्ती होने लगती है। बलिया में भी कुछ ऐसा ही हुआ यहां जिला पंचायत अध्यक्ष के दौरान कई ऐसे नजारे दिखे। जहां नेताओं ने गुट बदले। अपने पुराने साथियों को अलविदा कह नए दोस्त बना लिए। बसपा के अधिकृत प्रत्याशी के रुप में जिला पंचायत सदस्य बने आनंद चौधरी सपा में शामिल हो गए। सपा ने भी उनका पूरे शिद्दत से स्वागत करते हुए अपना प्रत्याशी बना दिया। बेटे ने सपा ज्वाइन की तो पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने भी बसपा को गुड बॉय बोल दिया। दूसरी ओर सुभासपा के बैनर से सदस्य बनीं सुप्रिया यादव ने भी चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थाम लिया। सत्ताधारी दल ने उन्हें प्रत्याशी घोषित किया।

सियारी गलियारों में बसपा और भाजपा की दोस्ती के चर्चा- बसपा और भाजपा की दोस्ती की शुरुआत आनंद चौधरी के सपा में शामिल होने से हुई, जहां आनंद चौधरी का विरोध करने बसपा विधायक उमाशंकर सिंह भाजपा प्रत्याशी को जिताने में जुट गए। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को जिताने में ताकत झोंक दी। चुनाव का केंद्र ही बसपा विधायक और उनका खनवर स्थित आवास बन गया। मतदान की पूर्व संध्या पर तो प्रदेश सरकार के मंत्री उपेन्द्र तिवारी व आनंद स्वरूप शुक्ल, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, भाजपा विधायक संजय यादव, सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त के पुत्र विपलेंदु प्रताप सिंह आदि ने बसपा विधायक के साथ उनके खनवर आवास पर डिनर भी किया। बताया जाता है कि

जिला पंचायत के तमाम सदस्य भी वहीं थे। इस डिनर की तस्वीर सामने आने के बाद भाजपा और बसपा की दोस्ती के चर्च हो रहे हैं। लेकिन राजनीति में दोस्ती का कोई भरोसा नहींं। लिहाजा सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह साथ जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव तक ही था या बात आगे तक भी जाएगी। हालांकि ऐसी किसी संभावना या चर्चा को बसपा विधायक ने साफ तौर पर खारिज किया है। उनका कहना है कि हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि बसपा विस चुनाव अकेले लड़ेगी। ऐसा है तो सवाल यह भी है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के वे मंत्री व सांसद बसपा विधायक के खिलाफ प्रचार में कितनी मजबूती से उतरेंगे। बहरहाल राजनीतिक गलियारों में इन दो दलों के मिलने से हलचलें जरुर मच गई हैं।

Rashi Srivastav

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