कुंडेसर चट्टी कांड- आरोपी बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह सबूतों के अभाव में बरी

गाजीपुर

बहुचर्चित कुंडेसर चट्टी कांड का 27 साल बाद मंगलवार को फैसला आ गया। एमएलसी बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।.

दो मई 1991 को भांवरकोल थाना क्षेत्र के कुंडेसर-चट्टी में मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी के काफिले पर फायरिंग हुई थी। इसमें तीन लोगों की मौत और कई लोग घायल हो गए थे। बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह और अनिल सिंह को मामले में आरोपी बनाया गया था।

 कोर्ट में एमएलसी बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह की पेशी के मद्देनजर कचहरी परिसर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई थी। पूर्वांह्न दस बजे से अपराह्न तीन बजे तक कचहरी परिसर पुलिस छावनी में तब्दील रही। कचहरी में आने और जाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही थी। संदिग्ध लोगों को पुलिस चेक करने के बाद ही कचहरी में प्रवेश करने दे रही थी। सादे वेश में भी दर्जनों पुलिस कर्मियों को लगाया गया था।

मामला मई 1991 में एक साथ हो रहे लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के दौरान प्रत्याशी अफजाल अंसारी के काफिले पर हुई कुंडेसर चट्टी पर गोलाबारी में तीन लोगों की मौत से जुड़ा था जिसका फैसला द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया। इस दौरान दोनों हत्यारोपियों को जज ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। वाराणसी सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में लाए गए एमएलसी बृजेश सिंह दोपहर करीब 12 बजे जनपद न्यायालय के कोर्ट नंबर दो में पहुंचे। दर्जनों लग्जरी गाड़ियां और निजी सुरक्षा कर्मी बृजेश के आगे-पीछे देखे गए। बृजेश के कोर्ट पहुंचने से पहले ही परिसर के बाहर सुरक्षा घेरा तगड़ा कर दिया गया था। कोर्ट में पेशी के बाद कागजी कार्रवाई पूरी कर बृजेश सिंह को सख्त सुरक्षा घेरे में वापस वाराणसी सेंट्रल जेल भेजा गया। एमएलसी बृजेश सिंह के जाने के डेढ़ घंटे बाद त्रिभुवन सिंह भी कोर्ट पहुंचा। एसपी सिटी प्रदीप दुबे तथा सीओ नगर आरबी सिंह के नेतृत्व में पुलिस का सुरक्षा घेरा सुबह से ही जस का तस बना हुआ था। कोर्ट में पहुंचने पर कागजी कार्यवाही पूरी की गई। इसके बाद गारद के साथ उसे मिर्जापुर जेल भेजा गया।

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