बगैर मुआवजा बन रहा है बलिया में टोंस नदी पर पुल, किसानों ने रोका काम

बलिया में टोंस नदी चितबड़ागांव से होकर गुजरती है। चितबड़ागांव नगर पंचायत के उत्तर दिशा से टोंस नदी का बहाव है। यहीं नदी पर एक पुल बनाया जा रहा है। ताकि इस इलाके को बलिया-मऊ मार्ग से जोड़ा जा सके। पुल निर्माण स्थल पर किसानों की खेत है। लेकिन बगैर भूमि अधिग्रहण के ही यहां पुल निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। जिसके विरोध में किसानों ने पुल का निर्माण रोक दिया।

टोंस नदी पर बन रहे पुल के पास किसानों की तकरीबन नौ साढ़े नौ बीघे जमीन है। जिसे बिना अधिग्रहण और मुआवजे के ही पुल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने बताया है कि हमें अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है और ना ही किसी प्रकार की नोटिस दी गई है। इस बात से नाराज किसानों ने गत मंगलवार को पुल निर्माण का कार्य बंद करवा दिया।

नगर पंचायत के रहने वाले भीमसेन तिवारी और श्रीराम तिवारी ने कहा है कि “हमारी साढ़े नौ बीघा जमीन यहां पर है। इसमें चार खातेदार हैं। बिना भूमि अधिग्रहण के ही पुल बनाया जा रहा है। हमने मुआवजे के लिए शिकायत भी की थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। न मुआवजा ही मिला और न कोई नोटिस।”

बलिया के सेतु निगम के पीओ संतराज का बयान छपा है कि किसानों को मुआवजा दिया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। सभी को एक साथ ही मुआवजा दिया जाएगा। पुल का काम शुरू करवाने के लिए किसानों से बातचीत हो रही है।” जाहिर है कि सेतु निगम के पीओ का यह बयान मामले को टालने वाला है। उन्होंने मुआवजा देने को लेकर कोई तया तारीख नहीं बताया कि आखिर कब तक यह प्रक्रिया पूरी होगी। किसानों को डर है कि पुल का काम पूरा हो जाने के बाद उनकी मांग नहीं सुनी जाएगी।

बता दें कि टोंस नदी पर साढ़े सतरह करोड़ की बजट से पुल का निर्माण हो रहा है। इसके लिए कुछ ही महीने पहले काम शुरू किया गया था। पुल का कुछ फीसदी काम हो भी चुका है। खंभे आधे बन चुके हैं। लेकिन बीते कल नाराज किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर पुल का काम बंद करवा दिया है। देखने वाली बात होगी कि शासन-प्रशासन अब कौन से आश्वासन देकर पुल का काम एक बार फिर शुरू करवाता है?

Akash Kumar

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