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दलित आंदोलन की आग में झुलसे कई राज्य, 4 की मौत, कई शहरों में कर्फ्यू

देश भर में दलित संगठनों के प्रदर्शन का जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा है। मध्य प्रदेश में हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई है। एमपी के मुरैना में 4 लोगों की मौत के बाद तीन शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इसमें सागर और ग्वालियर भी शामिल है। मुरैना में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यहां पर लोगों ने गाड़ियों में आग लगाई और रेल परिचालन को बाधित कर दिया। दलित संगठन ने केन्द्र सरकार पर अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने का आरोप लगाकर आज भारत बंद का ऐलान किया है।

हिंसा की चपेट में देश के कई शहर हैं। अलावा मेरठ, रांची, आगरा, भिंड में भी प्रदर्शन का असर देखने को मिला है। केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर में भी बड़े पैमाने पर आगजनी हुई है। यहां पर प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों में आग लगा दी और दुकानों में तोड़फोड़ की। गाजियाबाद में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर निकले और केन्द्र पर दलितों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। जयपुर में भी प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों के शीशे तोड़ दिये।

बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें राक दी और हंगामा किया। इसके अलावा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर सहित विभिन्न जिलों में लोग सड़क जामकर सड़कों पर आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, भाकपा (माले) और शरद यादव का समर्थन मिला है।

पंजाब और हरियाणा में भी जनजीवन ठप हो गया है। तलवारें, लाठियां, बेसबाल बैट व झंडे लिए सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर, अमृतसर व बठिंडा में दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों को जबर्दस्ती बंद करा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सोमवार सुबह अमृतसर जिले में एक ट्रेन को रोकने की कोशिश की, लेकिन रेलवे अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ट्रेन को जाने दिया। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के अंदर भी दाखिल हो गए। उन्होंने ट्रैक पर पुतले भी जलाए। कुछ राजमार्गो व सड़कों को भी जाम कर दिया गया है, जिसके कारण चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। पड़ोसी राज्य हरियाणा के रोहतक व दूसरे शहरों में भी विरोध प्रदर्शनों की खबरें मिली हैं। राज्य में दुकानें, शैक्षिक संस्थान व अन्य प्रतिष्ठान बंद हैं। पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षाओं की अंतिम प्रेक्टिकल परीक्षा सोमवार को होनी निर्धारित थी, लेकिन अब इसे 11 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा।

पंजाब सरकार ने सोमवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर एहतियाती उपाय के तौर पर रविवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का आदेश दिया था। पंजाब में सभी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक दलित आबादी है। राज्य की 2.8 करोड़ आबादी में 32 फीसदी दलित हैं। राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रविवार शाम 5 बजे से सोमवार शाम तक बंद कर दी गई हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने एससी/एसटी समुदाय से याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक अपना विरोध प्रदर्शन रोकने की अपील की है।

वहीं केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलित प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील की है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। कानून मंत्री ने कहा कि वरिष्ठ वकील सरकार के पक्ष को कोर्ट के सामने रखेंगे।

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