बलिया के सुरहा ताल में विदेशी मेहमान आने लगे हैं। ठंड आते ही सुरहा ताल में साइबेरियन पक्षियों की चहचाहट सुनाई देने लगती है। पानी में कलरव करते पक्षियों को निहारने लोग आते हैं। लेकिन इन पक्षियों पर शिकारियों की घातक नजर होती है।
बता दें कि सर्दियां शुरु होते ही सुरहा ताल में खासतौर से उच्च अक्षांशों के शीत क्षेत्रों अर्थात साईबेरियाई क्षेत्रों से पक्षी आते हैं। ये अति सुंदर, रंग-बिरंगे एवं मनोहारी होते हैं। इन पक्षियों में लालशर, हंस, राजहंस, बत्तक, रंग-बिरंगे बगुले, तोते, बघेड़ी सहित अनेक प्रकार की पक्षी शामिल होते हैं। ये काफी संख्या में झुंड बनाकर आते हैं। इसके साथ ही साथ अन्य क्षेत्रों से जैसे कुछ आस्ट्रेलियाई पक्षी भी आते हैं।
अभी बसंतपुर स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार पक्षियों से गुलजार हो गया है। पक्षियों के आने से सुरहा ताल में रौनक आ जाती है। लेकिन पक्षियों के आते ही शिकार सक्रिय हो गए हैं। साइबेरियन व अन्य पक्षियों का शिकार शुरु हो गया है। लेकिन वनविभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे इन शिकारियों के हौंसले बुलंद है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते शिकार नहीं रोका गया तो सुरहाताल वीरान हो जाएगा। बताया जाता है कि शिकारी तितलियों को पकड़ मार देते हैं। उनके अंदर कीटनाशक भरकर ताल के पानी में जगह-जगह रखते हैं। इसके बाद कुछ दूरी पर नाव में ही छिप जाते हैं। तितलियों को खाते ही पक्षी अचेत हो जाते हैं। तभी शिकारी उन्हें पकड़ कर नमक का घोल पिला देते हैं, जिससे पक्षी ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ पक्षियों की मौत भी हो जाती है। ऐसे में लोगों का कहना है शिकार पर तुरंत रोक लगाई जाना चाहिए।
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