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कहीं अस्पताल हैं तो डॉक्टर नहीं, कहीं सिर्फ कागज़ पर ही चल रहे अस्पताल, ऐसा है बलिया का हाल

बलिया डेस्क : कोरोनाकाल ने हमारे स्वस्थ्य सुविधाएं की पोल खोल कर रख दी है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि स्वस्थ्य सुविधाएं पहले से ही जर्जर थी और ग्रामीण इलाकों में लोग इस बुनियादी सुविधा से कोसो दूर थे, ऐसे में कोरोना ने एक बार फिर सभी का ध्यान इस पर केन्द्रित किया. बावजूद इसके बलिया के ग्रामीण इलाकों में सीएचसी और पीएचसी केंद्रों की हालत जस की तस है. ऐसे में यहाँ के लोग नीम हकीम के यहाँ इलाज कराने को मजबूर हैं.

दरअसल इन इलाकों में यूँ तो अस्पताल बना दिया गया लेकिन अभी तक उसमे डाक्टरों की तैनाती नहीं की गयी. इस वजह से वहां की व्यवस्था चौपट बनी हुई है. मजबूरन छोटी सी छोटी परेशानी को लेकर भी मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है. या फिर नीम हकीम के यहां. जिला मुख्यालय से महज़ 54 किमी दूर है बैरिया तहसील के जयप्रकाशनगर में बना नया सीएचसी. लेकिन यह बस नाम का पीएचसी है. सुविधा के नाम पर यहाँ कुछ ख़ास नहीं है. न तो प्रसव केंद्र है यहाँ और न ही टीकाकरण केंद्र.

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बड़ी बात यह कि यहाँ फ्रिजर तक नहीं है. इसकी वजह से यहाँ एंटी स्नेक वेनम भी उपलब्ध नहीं है. यहाँ हैं तो बस एक डॉक्टर और दो वार्ड बॉय. हैरत की बात है कि यहाँ एक्सरे मशीन नहीं है लेकिन इस सीएचसी में एक्सरे टेक्नीशियन है. पानी तक का भी इंतजाम नहीं है पीने को. इसके अलावा कर्ण छपरा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत बदतर है. डॉक्टर नहीं होने की वजह से यह काफी समय से बंद पड़ा है. दरअसल यहाँ जून के महीने में एक डॉक्टर की तैनाती की गयी थी लेकिन इसके अगले ही महीने पीजी कोर्स करने चले गए. वहीँ डॉक्टर के रहने का आवाज़ भी अभी पूरी तरह नहीं बना है.

यहाँ की तीस हज़ार ही आबादी की कोई सुध लेने वाला नहीं है. इसके अलावा इलाके के टोला शिवन राय में स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कई सालो से महज़ कागजों पर चल रहा. यूँ तो मानक के हिसाब से यह चार बेड वाला अस्पताल है लेकिन हकीक़त में एक भी बेड नहीं है. कर्मचारी भी आठ दिन तक की अपनी हाजिरी बना लेते है. इसी तहसील के लालगंज के अस्पताल भी बिना किसी डॉक्टर के चल रहा है. यहाँ एक लैब सहायक है. एक फार्मासिस्ट है और एक एक वार्ड बॉय.

इस मामले पर बलिया के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र पाल का कहना है कि जिले में चिकित्सकों की कमी है. उनका कहना है कि कोरोना की वजह से तमाम डाक्टरों की तैनाती जिला मुख्यालय कर दी गयी. उन्होंने कहा कि कोरोना ख़त्म होने के बाद आबादी के लिहाज़ से डाक्टरों की तैनाती कर दी जाएगी.

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