बलिया की सड़कों पर अनफिट वाहन दौड़ रहे हैं। इसे देखते हुए परिवहन विभाग के एआईटीओ अरुण कुमार राय के द्वारा कार्यवाही की गई। जहां शुक्रवार सुबह से लेकर दोपहर तक कुल 30 वाहनों का चालान और 8 स्कूली वाहनों को सीज किए गए।
इसके साथ ही एआरटीओ के द्वारा चेतावनी भी दी गई कि जो स्कूल अनफिट वाहनों का संचालन कर रहे हैं, उन पर लगातार कार्यवाही होती रहेगी। सभी लोगों से अपील है कि वह लोग अपने वाहनों का सही समय पर सही ढंग से फिटनेस करवा लें, वाहनों में जालियां लगवा लें, ताकि बच्चे अपना हाथ या सर खिड़की से बाहर न निकले।
बता दें कि जिलों की सड़कों पर इस समय करीब 261 बस और 200 छोटे वाहन अनफिट दौड़ रहे हैं। कई बार यह स्कूली बस हादसे का शिकार हो जाती हैं। इन बसों पर किसी भी तरह की फिटनेस का ख्याल नहीं रखा जाता। परिवहन विभाग का भी इन्हें कोई डर नही है। इन स्कूली वाहनों के द्वारा परिवहन के नियम कानून भी तोड़े जाते हैं। लेकिन अधिकारी फिर भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे।
शनिवार को दोपहर हुई पड़ताल में स्कूल संचालकों की लापरवाही दिखी। वह बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करते हुए दिखाई पड़े। 90 फीसद वाहनों में जाली नहीं लगी थी। चित्तू पांडेय चौराहा पर ई-रिक्शा व टेंपों से बच्चे को स्कूल ले जा रहे हैं। यहां तक कि पीले रंग से भी वाहनों को कलर नहीं किया गया। इन स्कूली वाहनों में न तो कोई मेडिकल किट हैं, न ही फायर सिस्टम है।
सिकंदरपुर बस स्टैंड पर भी कई ऐसे वाहन हैं जिनकी खिड़कियों में जाली तक नहीं है। बैरिय में भी यही हालात दिखे, जहां कर्णछपरा में एक मैजिक वाहन से खिड़की हाथ निकाले हुए दिखी। इससे पहले भी चुनाव के दौरान लापरवाही सामने आई थी जहां विधानसभा चुनाव के दौरान पता चला था कि अधिकांश वाहनों का फिटनेस ही नहीं है। इसके बाद 180 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद 319 बसों का फिटनेस हुआ लेकिन 261 बसें आज भी बिना फिटनेस के सड़क पर दौड़ रही हैं। कोरोना काल के दौरान स्कूल बार-बार बंद हो रहे थे। बच्चों की संख्या कम होने के चलते स्कूल वाहनों का संचालन नहीं के बराबर था, इसके चलते परिवहन विभाग ने वाहनों के मानकों की जांच कम कर दी थी। इसके चलते स्कूल संचालक बेपरवाह हो गए।
एआरटीओ ने बताया कि स्कूली वाहनों को निन्म नियमों का पालन करना चाहिए। चालक वर्दी में हो और बस व वैन की उम्र 10 वर्ष से अधिक नहीं हो, प्रदूषण सर्टीफिकेट और रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र हो, परमिट वैध हो जबकि ड्राइविग लाइसेंस पांच वर्ष पुराना हो, सीएनजी का नो लिकेज प्रमाण पत्र होना चाहिए, वाहन का रंग पीला हो, रिफलेक्टर टेप लगा हो और इमरजेंसी गेट की व्यवस्था जरूर हो, नंबर प्लेट साफ दिखाई दे और पायदान की ऊंचाई एक फीट से अधिक नहीं हो, खिड़की में ग्रिल लगा होना चाहिए।
मेडिकल किट होनी जरूरी है। अग्निशमन यंत्र हो, लेकिन प्रेशर हार्न नहीं लगाना चाहिए। बैग रखने की जगह और बोतल रखने के लिए क्लिप हो। स्पीड गवर्नर हो, साथ ही जीपीएस सिस्टम लगा होना चाहिए।सीटों की स्थिति अच्छी हो और फायर फायटिग सिस्टम हो। स्कूल वाहन की खिड़कियों पर ग्रिल और जाली लगी होनी चाहिए। स्कूल बस के पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए। दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
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