बलिया पुलिस के वसूली कांड सामने के बाद नए पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर मीडिया से मुखातिब हुए, लेकिन प्रेस कान्फ्रेस के दौरान एसपी प्रमुख मुद्दों पर चुप्पी साधे नजर आए। नए एसपी की खामोशी पुलिस विभाग के मातहतों की धुकधुकी बढ़ा दी है। खासकर सीमावर्ती थानों के थानाध्यक्षों और पुलिसकर्मियों की बेचैनी बढ़ गई है।
2014 बैच के आईपीएस विक्रांत वीर शनिवार को फेफना सड़क दुर्घटना के बाद जिला अस्पताल में काफी मुस्तैद दिखाई दिए और खुद जिला अस्पताल में घंटो जमे रहे। इसके बाद बांसडीह कोतवाली में जाकर थाना दिवस में जनता की फरियाद सुनी। प्रेसवार्ता के दौरान खुदकी मंशा स्पष्ट करने के बजाय पत्रकारों से सुझाव मांगे।
एसपी के सामने सीमावर्ती इलाकों के थानों और वहां के थानाध्यक्षों की कार्यशैली के बारे में जानकारी ली गई। बालू, दारू और पशु तस्करी का खेल किन थाना क्षेत्रों में ज्यादा होता है, इसकी भी जानकारी ली। लेकिन एसपी साहब खुलकर कुछ नहीं बोले। जनपद में तस्करी चाहे वह बालू हो या दारू या फिर गाय, सबसे ज्यादा बदनाम मनियर, बैरिया, दुबहर, हल्दी, दोकटी और नरहीं है। इस पर एसपी साहब ने तुरंत यहां की भौगोलिक स्थिति को जाना और अपनी डायरी में नोट कर लिए।
बलिया के नवागत एसपी विक्रांत सिंह भी तत्कालीन एसपी प्रभाकर चौधरी के नक्शे कदम पर चल रहे हैं। उन्होंने 3 महीने के कार्यकाल में जो छाप छोड़ी, वह आज भी नजीर है। ठीक वैसा ही तेवर विक्रांत वीर में उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने कहा कि उनका निजी नंबर भी जनता जनार्दन में साझा किया जाएगा। ताकि कहीं भी जनता को कोई समस्या हो और यदि संबंधित थाने में उनकी सुनवाई नहीं होती है तो वह डायरेक्ट फोन पर बात करके मुझे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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