बलिया। शिक्षा क्षेत्र रसड़ा अंतर्गत प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सरकार द्वारा शिक्षा के उन्नयन एवं बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिये बच्चों को जूता, मोजा, भोजन में सामान्य खाना के अलावा दूध और फल दिये जाने का दावा किया जा रहा है।
किन्तु वास्तविक धरातल पर इनमे से कई सुविधाये बच्चों को न दिये जाने के कारण ये योजनाएं कई विद्यालयों में बच्चों के लिये महज सफेद हाथी बनकर रह गयी है। यह भी सच है कि इसकी जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को बखूबी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसा क्यों किया गया है यह भी उच्चाधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करके रख दिया है।
कुल मिलाकर तमाम विद्यालयों में विद्यालय खुलने के प्रथम दस दिन के अंदर शासन द्वारा बच्चों को मुकम्मल एमडीएम, दूध, फल के अलावा जूता, मोजा, ड्रेस, बैग, किताब आदि की उपलब्धता सुनिश्चित न कराये जाने का फरमान जारी किया गया था। किन्तु कई विद्यालयों में कई विंदू पर आज भी अमल नहीं किया गया। जिसके कारण बच्चों को बिना शासन द्वारा देय सुविधा के स्कुल जाना पड़ रहा है।
गौरतलब हो कि सरकार हर-हाल में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को आकर्षित कर शत्-प्रतिशत शिक्षा के लक्ष्य को पूरा करना चाहती है। इसके लिये सरकार द्वारा बच्चों में किताब, बैग, मध्यान्ह भोजन के तहत खाना, फल दूध, स्वेटर आदि देने का इंतजाम किया गया है। किन्तु सच्चाई यही है कि अधिकांश स्कूलों में फल, दूध न के बराबर दिया जाता है। किन्तु मध्यान्ह भोजन में जो अनियमितता की जा रही है, यह काफी संवेदनहिनता का परिचायक है। इसकी जांच हर-हाल में कराकर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिये।
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