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बलियाः पीपीपी मॉडल पर होगा पीएचसी का संचालन, तैयार हो रहा प्रस्ताव

बलियाः भारत के कई क्षेत्रों में पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप के माध्यम से विकास की नीति पर काम किए जा रहे है। यूपी सरकार कई क्षेत्रों में पीपीपी मॉडल पर काम कर रही है। इसी कड़ी में अब जिले में भी एक पीचएसी का संचालन पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि बलिया में चिकित्सकों की भारी कमी है। जिले से लेकर ब्लॉक लेवल अस्पतालों में डॉक्टर्स नहीं है। ऐसे में मरीजों को ठीक इलाज नहीं मिल पाता और उन्हें हायर सेंटरों में रेफर करना पड़ता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में कुल 18 सीएचसी, 13 पीएचसी और 66 न्यू पीएचसी है। इनके संचालन के लिए 205 चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। लेकिन इनके सापेक्ष केवल 105 चिकित्सक ही तैनात हैं। इनमें से भी 20-30 डॉक्टर अवकाश-पढ़ाई के लिए बाहर रहते हैं। बमुश्किल 70 से 80 चिकित्सकों पर पूरे जिले के मरीजों की इलाज की जिम्मेदारी है।

ऐसे में शासन ने एक पीचएसी का संचालन पीपीपी मॉडल पर करने का निर्णय लिया है। इसके बाद अस्पताल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, टेक्नीशियन व अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पर होगी। सीएमओ डॉ. जयंत कुमार ने बताया कि अभी ये योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है। इसमें हमें सिर्फ पीएचसी का प्रस्ताव शासन को भेजना है।

बता दें कि जिले में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। वहीं आठ केंद्र नए बनें हैं, कुछ का काम जारी है। इसमें से इसमें फेफना, बसंतपुर व मनियर सीएचसी को कार्यदायी संस्था द्वारा हैंडओवर कर दिया गया है। वहीं, रतसर, चिलकहर, बेरुआरबारी (सुखपुरा), चितबड़ागांव, सहतवार सीएचसी निर्माणाधीन है। पीएचसी की बात करें तो जिले में अभी 13 पीएचसी हैं, 66 न्यू पीएचसी है। 12 का निर्माण चल रहा है। इसमें से इसमें से सात पीएचसी शिवपुर दीयर गंगापार, सोहाव, जवहीं गंगापार, नगपुरा, कोटवारी, भीमपुरा नंबर-दो, मेड़वाकला पीएचसी को हैंडओवर कर दिया गया। इंदरपुर व खरौनी को अभी स्थानांतरित नहीं किया गया है। इनमें से कुछ सीएचसी-पीएचसी डॉक्टर्स की कमी के कारण बंद हो चुके हैं। अगर पीपीपी मॉडल के द्वारा पीएचसी का संचालन सफल रहा तो स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधरने के आसार हैं।
Rashi Srivastav

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