बलिया में मनरेगा कार्यों में हुए 46.27 लाख की अनियमितता में कई प्रधानों व सचिवों से वसूली होनी है। ढ़ाई साल पहले वित्तीय गड़बड़ी सामने आई थी लेकिन अभी तक वसूली नहीं हो पाई है। ऐसे में शासन के निर्देश पर एक बार फिर कार्रवाई तेज हो गई है। संबंधित बीडीओ को पत्र जारी किया है।
बता दें कि साल 2018-9 में कराए गए मनरेगा कार्यों की ऑडिट ढ़ाई साल पहले हुई थी। इस दौरान जिले के 91 गांवों के कुल 102 कार्यों में कुल 46 लाख 27 हजार 738 रुपए की गड़बड़ी सामने आई थी। जिसके बाद रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंपी गई थी। इस मामले में आगे जांच हुई तो 50 सचिव, 15 मनरेगा टीए और कई तत्कालीन प्रधान दोषी पाए गए थे।
इनसे गबन की गई राशि की वसूली होना थीा। लेकिन ढ़ाई साल में वसूली नहीं हो पाई है। ऐसे में जिला विकास अधिकारी ने एक बार फिर मनरेगा उपायुक्त को पत्र भेजा है, साथ ही वसूली की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा दोषी ग्राम विकास अधिकारियों से वसूली की धनराधि निर्धारित कर उपलब्ध कराए जाने और संबंधित प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारियों से वसूली जाने वाली धनराशि की सूचना डीपीआरओ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
बलिया डीडीओ राजित राम मिश्रा का कहना है कि वर्ष 2018-19 में हुई सोशल ऑडिट में मिली वित्तीय अनियमितता के सापेक्ष धनराशि की वसूली विभिन्न कर्मियों से की जानी है। पूर्व में भी पत्र भेजा गया था और एक बार फिर पत्र भेजकर वसूली करने को कहा गया है।
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