बलिया में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव मानो सत्ताधारी दल के लिए साख का सवाल बन गया है। तभी तो सत्ता अब लोकतांत्रिक मूल्यों पर हावी होने लगी है। लोकतंत्र के महापर्व में लोकतंत्र का ही ग’ला घोंटा जा रहा है। सत्ताधारी पार्टी साम दाम दंड भेद का इस्तेमाल सीटें जीतने के लिए तमाम तरह के हथकंडे भी अपना रही है। अब चुनावी रण में सत्ताधारी दल ने पुलिस को अपना मोहरा बना लिया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सत्ताधारी दल के इशारों पर पुलिस विपक्षियों पर कार्रवाई कर रही है और ज़मीनी स्तर पर भी यह देखने को मिला जब योगी सरकार के मंत्री भी आधी रात पुलिस चेकिंग में शामिल होने पहुंच गए।
मामला भरौली बक्सर पुल का है, जहां बीती रात लगभग 12 बजे के बाद पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्ष में कोई विवाद न हो इसलिए चेकिंग अभियान चला है। जबकि चुनाव में कूदे विपक्ष के लोगों की मानें तो पुलिस का इरादा विपक्ष के पक्ष में मूड बनाए जिला पंचायत सदस्यों को हिरासत में लेने का था। खैर पुलिस को कुछ भी हाथ नहीं लगा। लेकिन मामले ने तूल तब पकड़ा जब चेकिंग के वक्त सरकार के एक मंत्री बकायदा लाव लश्कर के साथ मौके पर मौजूद थे।अब सरकार के मंत्री का चेकिंग में क्या काम? यह बात लोगों को हज़म नहीं हो रही है।
क्षेत्र में लोग एक-दूसरे से पूछने लगी कि आखिर क्या बात है। अंदर से निकली बात ने यह स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे आनंद चौधरी के वोटरों पर सत्ता की नजर थी। योजना यह थी कि जिला पंचायत सदस्यों को हिरासत में लेकर उन्हें अपने पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित किया जाए। खैर आगे क्या हुआ इसका तो पता नहीं चल पाया, लेकिन सपा की मानें तो उनका यह कहना था कि “सरकार कितना भी ताकत लगा लें, जीत हमारी होगी। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सत्ताधारी दल इस तरह का नंगा नाच रही है।
जबकि अब तक चुनाव पहले कभी ऐसा नहीं हुआ।” वहीं दूसरी ओर चेकिंग के सिलसिले में नरहीं थाना प्रभारी योगेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि दोनों पक्ष में कोई विवाद न हो इसलिए रात को चेकिंग अभियान चलाया गया। मंत्री के सवाल पर कन्नी काटते हुए बताया कि मुझे कुछ जानकारी नहीं है। बहरहाल आज होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों आमने-सामने है। बीजेपी और सपा दोनों ही ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। जीत-हार का फैसला शाम 5 बजे के बाद हो जाएगा।
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