बलिया लोकसभा सीट- क्या नारद राय होंगे गठबंधन के उमीदवार ?

बलिया- लोकसभा चुनाव में अब महज़ कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में किस उम्मीदवार को टिकट मिलेगा और किसका टिकट कटेगा इसपर अटकलें तेज़ हो गई हैं।

बलिया लोकसभा सीट पर भी टिकट बंटवारे को लेकर यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बार समाजवादी पार्टी (सपा), जो कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन में है, पार्टी सूत्रों से बलिया खबर को मिली जानकारी के मुताबिक इस बार बलिया के कद्दावर नेता नारद राय को चुनावी मैदान में उतार सकती हैं।

फ़िलहाल इस सीट पर भाजपा का कब्ज़ा है ।  2014 मे हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी के भरत सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को  1,39,434 मतों के अंतर से हरा कर ये सीट जीती थी ।

कौन हैं नारद रॉय 

नारद रॉय सपा के सबसे तेज़ तर्रार नेताओं में गिने जाते हैं। पहले उन्होंने सपा का साथ छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव सरकार तक में कैबिनेट मंत्री रहे नारद राय ने सपा का साथ इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि उन्हें इस बात का एहसास हो गया था कि उन्हें पार्टी बलिया सदर सीट से टिकट नहीं देगी।

सपा से टिकट न मिलने की आशंका पर वह मायावती के ख़ैमे में शामिल हो गए थे। समाजवादी पार्टी ने उन्हें पहली बार 2002 में टिकट दिया था। उन्हें टिकट दिवंगत विक्रमादित्य का टिकट काटकर दिया गया था। वह जीते और खुश होकर मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राज्यमंत्री बना दिया। 2002 से लेकर 2007 तक वह शहरी विकास राज्यमंत्री रहे।

2007 में भी उन्हें सपा ने टिकट दिया, लेकिन वह बसपा प्रत्याशी मंजू सिंह से हार गए। लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने उनपर भरोसा जताया और 2012 में उन्हें एक बार फिर टिकट दे दिया। इस बार सपा की लहर और बसपा की एंटी इनकम्बेंसी के चलते वह फिर जीत गए। जिसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया। लेकिन बाद में जब सपा में रार पड़ी तो इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। शिवपाल का करीबी होने की वजह से अखिलेश ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया।

बाद में जब स्थिति सामान्य हुईं तो उन्हें फिर से मंत्री बना दिया गया। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने शिवपाल का साथ नहीं छोड़ा जिससे नाराज़ होकर अखिलेश ने उनका टिकट काट दिया और वह बसपा में शामिल हो गए। इसके बाद 2017 चुनाव में बसपा को प्रदेश भर में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

बसपा की इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने दोबारा सपा का रुख किया। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी उन्हें दिवंगत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर पर तरजीह दे सकती है। आप को बता की इस वक़्त नीरज शेखर राज्यसभा सदस्य है ।

नीरज शेखर 2007 और 2009 में बलिया लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। इलाके में उनका भी मज़बूत जनाधार है। हालांकि 2014 में उन्हें मोदी लहर में बीजेपी के भरत सिंह से शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंधन के बाद परिस्थितियां बदल चुकीं हैं। ऐसे में क्या  समाजवादी पार्टी एक मज़बूत जनाधार वाले ज़मीनी नेता नीरज शेखर की जगह अपने ही दुसरे कद्दावर नेता नारद राय को तरजीह देगी ? ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा !

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