बलिया। बेरुआरबारी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस वक्त अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जो खुद मेटेनेंस के अभाव में वेंटिलेटर पर है। जहां वार्ड और कर्मचारियों के आवास की छत काफी दिनों से टूट-टूट कर गिर रही है। वार्ड की छत टूटने से भर्ती मरीजों को लेकर डॉक्टर भी दहशत में हैं। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आस-पास के दर्जनों गांवों के मरीजों के लिए इसी अस्पताल में आते हैं। लेकिन डर के साय में इलाज कराने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर, अस्पताल जर्जर- बता दें अस्पताल में 24 घंटे फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी मौजूद रहते हैं, जिससे मरीजों को राहत है लेकिन जर्जर भवन में डॉक्टर अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अस्पताल परिसर में मरीजों के पानी के लिए लगाए गए दो हैंडपंप हैं, लेकिन एक पिछले 6 महीनों से खराब पड़ा है। इससे मरीजों को पानी के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। जबकि अस्पताल पर रोजाना सैकड़ों मरीजों का आना-जाना लगा रहता है।
वहीं लचर व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय लोगों ने इस ओर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया। जनहित में नल और जर्जर भवन को तत्काल ठीक कराने की मांग की भी है। लेकिन अब तक मांग को कोई ध्यान नहीं गया। नतीजन मरीजों को डर के साय में इलाज कराना पड़ रहा है। क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प भी नहीं है।
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