बलिया। ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ कहावत उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के बाबुओं पर सटीक बैठ रही है। दरअसल, शासन ने शिक्षा विभाग के बाबुओं की संपत्ति का ब्यौरा मांग लिया है, जिससे बाबुओं में खलबली मच गई है।यह बात समाज के आखिरी पायदान का व्यक्ति भी जनता गई कि सरकारी विभागों में किस तरह से काम होता है। संपत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन उपलोड करने का आदेश मिलने के बाद बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक ही जगह वर्षों से जमे मोटी ऊपरी कमाई करने वाले बाबुओं के चेहरे का रंग उड़ गया है।
एक ईमानदार व्यक्ति आने जीवनकाल में घर-बार, बच्चों की पढ़ाई-शादी के बाद तब जाकर घर बना पाता है।लेकिन इनमें से कई ऐसे बाबू हैं जिन्होंने छोटी सी नौकरी में ही शहर में आलीशान कोठियां बना ली हैं। यही नहीं कई जगहों पर उनकी ज़मीने हैं, सरकार का जांच का आदेश होने के बाद बाबू गुणा गणित करने में लग गए हैं कि कैसे बच जाए।यह ब्यौरा बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के बाबुओं से मांगा गया है। ये भ्रष्ट बाबू हर काम के लिए अंडर टेबल पैसे लेते हैं। यही नहीं ये बाबू परेशान व्यक्ति को टेबलों के इतने चक्कर लगवाते हैं कि वो
और परेशान हो जाता है।इन बाबुओं की कमाई का जरिया, शिक्षकों की संबद्धता, एरियर भुगतान मृतक आश्रित नियुक्ति, स्कूलों की मान्यता परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में अफसरों का हवाला देकर मोटी कमाई की जाती है। इन बाबुओं पर अफसरों का हाथ होता है, क्योंकि यही बाबू पैसे की जनता से उगाही कर अफसरों को उनका हिस्सा देते हैं।मगर, भ्रष्टाचार करने वाले सरकारी बाबू या अन्य लोग इस हराम की कमाई से जो कुछ खरीदते हैं वो आने परिवार के सदस्य या आने रिश्तेदारों के नाम से खरीदते हैं। यही काम बाबुओं ने भी किया हुआ है, उन्होंने बैंक बैलेंस के साथ ही आशियाना भी घर के किसी और सदस्य या फिर रिश्तेदारों के नाम कर रखा है।
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