बलिया के किसानों की चमकेगी किस्मत, सुरहा ताल की मिट्टी केसर की खेती के लिए मुफ़ीद !

बलिया। लाल सोने के नाम से मशहूर केसर की खेती अब कश्मीर में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के बलिया में भी होगी। बलिया के सुरहा ताल की मिट्टी और आबोहवा को केसर की खेती के लिए उपयुक्त पाया गया है।

ये बात शोधकर्ता शिवकुमार सिंह कौशिकेय द्वारा किए गए झील के एक सर्वे से सामने आई है। कौशिकेय ने बताया कि केसर की खेती के लिए जो मिट्टी और वातावरण चाहिए वो सुरहा ताल में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि झील के पानी में विभिन्न प्रकार की जलीय वनस्पतियों के साथ सड़े हुए जैविक उर्वरक से भरपूर मिट्टी उपलब्ध है, जो केसर की खेती के लिए उपयुक्त है।

बता दें कि भारत में केसर की कीमत इस समय 2,50,000 से 3,00,000 रुपए प्रति किलो तक हो गई है। ऐसे में अगर 24:9 वर्ग किमी में फैले हुए सुरहा ताल में केसर की खेती होती है तो बलिया के किसानों को बड़ा फायदा होगा। वो केसर की केती कर लाखों रुपए आसानी से कमा सकते हैं।

कौशिकेय ने कहा कि जहाँ तक खेती के लिये केसर के बीज और बिक्री के लिये बाजार की बात है तो गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद का कृषि फार्म खुरपी इसके लिए उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस फार्म हाउस में इसके लिए भूमि और ग्रीन हाउस बनाया गया है जो मिट्टी और परिवेश सुरहा ताल में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध है।

भारत में बेशकीमती केसर की खेती सबसे ज़्यादा जम्मू-कश्मीर में होती है। दुनिया में जम्मू-कश्मीर का केसर क्वालिटी के मामले में सर्वोत्तम माना जाता है और उत्पादन के लिहाज से भी भारत ईरान के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है।

कश्मार में होने वाली इस खेती के दम पर भारत केसर को दुनियाभर में निर्यात करता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत देसी करेंसी के रूप में देखें तो करीब पांच लाख रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि देसी बाजार में तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। अगर बलिया में भी केसर अच्छी क्वालिटी का होता है तो ये भारत को आर्थिक रुप से मज़बूत बनाने में मददगार साबित होगा।

इनपुट – तिलक कुमार

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