बलिया में बाढ़ के पानी से जनजीवन अस्त व्यस्त है। सड़कें डूब चुकी है। घरों में पानी भर गया है। ऐसे में आम नागरिक परेशान हैं। खास तौर पर सड़कों और बांधों पर जीवन यापन कर रहे लोगों की हालत खराब है। बाढ़ में टीन टप्पर और प्लास्टिक की चादर के नीचे सर छुपाए बैठे लोगों की स्थिति दयनीय है।
बाढ़ की वजह से एनएच 31 के किनारे कई परिवारों ने डेरा डाल रखा है। प्लास्टिक की पन्नियों से उन्होंने सर ढंकने का इंतजाम कर रखा है। दिन हो या रात, छोटी सी टपरी में गुजारा कर रहे यह परिवार एक ही खटिया पर बैठे रहते हैं।
शुक्रवार को इन परिवारों की मुसीबतें और बढ़ गई जब आसमान से तेज बारिश होने लगी।
प्लास्टिक के छज्जे से बनी झोपड़ियां बिखरती नजर आईं। बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए दूबेछ्परा में संचालित कैम्प विद्यालय में वारिश की वजह से अफरा-तफरी का माहौल रहा। शिक्षकों ने बमुश्किल बच्चों को भोजन कराया। बता दें कि बलिया में खतरे के निशान से ऊरबह रही गंगा के जलस्तर में गिरावट आनी शुरु हो गई है। लेकिन नगर व ग्रामीण क्षेत्रों बाढ़ का पानी अभी भी कहर बरसा रहा है।
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