बलिया डेस्क– कहने को तो ये पूर्व प्रधानमन्त्री जी का जिला है, वर्तमान में बलिया से 1 लोकसभा सदस्य, 1 राज्यसभा सदस्य, 2 मन्त्री व तीसरी मन्त्री सरोजिनी नगर लखनऊ से विधायक हैं, आधा दर्जन सत्ताधारी विधायकों से सुसज्जित बलिया स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति अत्यन्त बदहाल है, मरीज़ों के लिए न तो मानवीय संवेदनाएं है ना ही कोई सुविधा,साधारण दवाएं भी यहाँ उपलब्ध नहीं है।
प्रत्येक डॉक्टर की दवा की दुकानें और पैथालॉजी सेट हैं, भेड़-बकरियों जैसी स्थितियों से जूझ रहे रोगियों की स्थितियाँ विकट हैं। वर्तमान में शहरों से पलायन कर लौटे बलियावासी #कोरोना की आशंका के कारण यहाँ जाँच कराने पहुँच रहे हैं किन्तु यहाँ जाँच कक्ष में बैठे डॉक्टर बग़ैर कोई जाँच किए दूर से ही मरीज को टाटा बाय बाय कर दे रहे है बलिया के जनप्रतिनिधियों द्वारा करोड़ों कि राशि जिले के स्वास्थ्य विभाग को मिली है परन्तु उस राशि का उपयोग कहा हो रहा है समझ नहीं आ रहा है
डॉक्टरों का कुछ ऐसा बर्ताव है मरीज़ों के साथ-
‘4-5 दिन घर पर आराम करो सब ठीक हो जाएगा।’
‘अरे तुम तो नौजवान हो, तुम्हारा कोरोना भला क्या बिगाड़ लेगा’
‘खोपड़ी पर क्यों खड़े हो, कोई जाँच-वांच नहीं होगी’
‘ज़्यादा बहस मत करो, जाओ बाहर टोलफ्री नम्बर पर जिससे शिकायत करना हो कर दो’
जहाँ पूरी दुनिया के डॉक्टर भगवान बनकर लोगों की मदद में दिन रात जुटे हैं ऐसे में बलिया हॉस्पिटल की स्थिति बदतर और बदहाल है जिसकी खोज-खबर लेने वाला कोई नहीं है।
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