बलिया। कर्मचारी संगठनों में आज भी ऐसे कर्मचारी नेतागिरी कर रहे हैं, जो रिटायर हो चुके हैं। कर्मचारी संगठन पर ऐसे मठाधीशी करने वाले लोगों पर अंकुश लगाने के लिए जिलाधिकारी ने एक आदेश जारी किया है।
मुख्य विकास अधिकारी अपर जिलाधिकारी को जारी किए गए आदेश में साफ कहा है कि सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी अगर संगठन की बात करते हो तो उनकी नहीं सुनी जाए। इस आदेश से पुराने मठाधीशों में खलबली मची हुई है। जिलाधिकारी का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के साथ करना आवश्यक है।
कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों से वार्ता कर समस्याओं को निपटाया जाना चाहिए। लेकिन कुछ संगठन में सेवानिवृत्त व्यक्ति भी पदाधिकारी के रुप में शामिल है, जबकि शासनादेश व परिसंघ की नियमावली के अनुसार रिटायर व्यक्ति किसी भी संगठन का पदाधिकारी नहीं हो सकता।
उल्लेखनीय है कि अधिकांश ऐसे मामले देखे जाते हैं जहां कर्मचारी हित नहीं बल्कि व्यक्तिगत हित के लिए भी कर्मचारी संगठनों का दुरुपयोग होता है। छोटे-मोटे मामलों को भी आंदोलन का रूप देकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है इसके चलते सरकारी कामकाज भी प्रभावित होता है ।
संगठनों में आज भी अधिकांश मठाधीश ऐसे हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनको सरकारी कामकाज से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। उनको सरकारी कार्रवाई का भी डर नहीं रहता है।
ऐसे में कभी-कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए भी संगठन का प्रयोग करते देखा जाता है। इसी पर रोकथाम के लिए जिलाधिकारी भवानी सिंह ने एक आदेश जारी किया है कि रिटायर हो चुके कर्मचारी अगर संगठन की बात करते हैं तो उनकी नहीं सुनी जाए।
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