बलियाः कौन कहना है कि आसमां में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…. यह कहावत चरितार्थ कर दिखाया है बलिया के सत्येंद्र ने। पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर तैनात सत्येंद्र अपनी मेहनत और लगन के दम पर असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए हैं।
सत्येंद्र के पिता फूल चंद यादव आजमगढ़ में पुलिस विभाग में दारोगा (एसआई) हैं। सत्येंद्र शुरु से ही प्रतिभावान रहे हैं। 2005 में उन्होंने 72 प्रतिशत अंक से 10वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद 2007 में 75 प्रतिशत अंक हासिल कर 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। साल 2010 में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। 68.33 प्रतिशत अंक हासिल किए। सत्येंद्र को नौकरी करने का जूनून था।
साल 2011 में उनकी किस्मत में वर्दी आई। तो उन्होंने पुलिस का हिस्सा बन सिपाही की नौकरी की। लेकिन बचपन से सत्येंद्र को टीचर बनने का शौक था। तो उन्होंने 2012 में एमए की ड्रिगी हासिल की। इसके बाद लग गए अपने सपने को पूरा करने। उन्होंने पुलिस की ड्यूटी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद 2013 में नेट क्वालीफाई किया। इस बीच उन्होंने पढ़ाई जारी की।
इसी लगन के दम पर उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सफलता हासिल लगी। उनका चयन उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग द्वारा घोषित चयन परिणाम (सामान्य सूची) में ‘असिस्टेंट प्रोफेसर’ के पद पर हो गया है। सत्येंद्र ने अपने सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार के सदस्यों को दिया है। सत्येंद्र तीन भाईयों में सबसे बड़े हैं। छोटा भाई कमलेश यादव बेसिक शिक्षक है, जबकि आशीष भी शिक्षक की तैयारी में जुटे है। सत्येंद्र ने अपनी सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि करियर के पथ पर ईमानदार प्रयास कभी विफल नहीं हो सकता।