बलिया में शहीद विजय तिवारी का शव सोमवार को पैतृक गांव पहुंचा। वीर सपूत को देख स्थानीय लोगों की आंखे नम हो गईं। नरहीं थाना क्षेत्र के सरयां गांव में शहीद के अंतिम संस्कार के लिए सैंकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद जवानों ने विजय को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी।
विजय तिवारी के पुत्र आदित्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। बता दें कि 56 वर्षीय विजय 1987 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह सीमा सुरक्षा बल में तैनात थे। 14 तारीख की शाम को वह ड्यूटी पर थे। तभी उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जांच में पता चला कि उनके दिमाग में ब्लड जम गया है। इलाज शुरु हुआ लेकिन 16 तारीख को उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को आसाम की अगरतला से लखनऊ एयरपोर्ट के माध्यम से लाया गया। वहां से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे होते हुए गाजीपुर के रास्ते बलिया लाया गया। यहां पर अधिकारीगण एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचाया।
इसके बाद स्ट्रीमर घाट सरया में गंगा किनारे विजय का अंतिम संस्कार हुआ। उनके पार्थिव शरीर को जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ 24 राउंड शहीद के सम्मान फायर कर सलामी दी। इससे पूर्व क्षेत्राधिकारी सदर अशोक त्रिपाठी, थानाध्यक्ष पन्नालाल एवं अन्य ने जवान को पुष्प चढ़ाकर सलामी दी। विजय तिवारी की तीन पुत्रियां हैं। बताया जा रहा है कि बीएसएफ के जवान विजय तिवारी मृदुल व्यवहार के थे। छुट्टी के समय गांव आने पर सभी के साथ हिल मिल कर रहते थे। इस अवसर पर गांव के ग्राम प्रधान मुकेश तिवारी, सुशील राय, कमला राय समेत सैकड़ों लोग विदाई समारोह में थे।
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