बलिया में डॉक्टर्स की मनमानी की वजह से मरीजों को प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र का लाभ नहीं मिल रहा है। जहां डॉक्टर्स मरीजों को पर्ची पर साल्ट की जगह ब्रांडेड कंपनी का नाम लिख रहे हैं। जबकि प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों पर सभी तरह की दवा उपलब्ध है। इसके चलते मरीज जन औषधि केंद्र का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। हालांकि मरीजों के पहुंचने पर औषधि केंद्र के संचालक ब्रांड की जगह जेनरिक दवा खुद की समझ के आधार पर दे रहे हैं। चिकित्सक यदि साल्ट के नाम से मरीजों को पर्ची जारी करें तो दवा सस्ते में जनऔषधि केंद्र पर मिल सकती है।
दरअसल प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर डॉक्टर्स का उदासीन रवैया उजागर हो रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल और जनऔषधि केंद्र की पड़ताल में यही तस्वीर सामने आयी। केंद्र संचालक सुशील सिंह को एक चिकित्सक की पर्ची दिखाकर बोले कि चिकित्सकों की यह लिखावट कौन समझ पाएगा। इसे चिन्हित मेडिकल स्टोर वाले ही समझ पाते हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1500 मरीज आते हैं, लेकिन जन औषधि केंद्र से 10 फीसद ही मरीज दवा खरीदते हैं। अस्पताल में 18 डॉक्टर में सिर्फ दो डॉक्टर ही साल्ट के नाम से दवा लिखते हैं। औषधि केंद्र पर 350 से अधिक प्रकार की जेनरिक दवाएं मौजूद हैं।
ब्रांडेड कंपनियों जैसा ही काम करती जेनरिक दवा- वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिवाकर सिंह ने बताया कि किसी एक बीमारी के इलाज के लिए एक साल्ट पर दवा तैयार होती है। उस साल्ट को कंपनियां अलग-अलग नामों से बेचती हैं। ब्रांडेड दवा की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, जबकि जेनेरिक दवाओं का मूल्य निर्धारित करने में सरकार का हस्तक्षेप होता है, इसे मरीजों को समझने की जरूरत है। सभी चिकित्सकों को जेनरिक दवा लिखने के लिए निर्देशित किया गया है।
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