बलिया: गंगा नदी की तेज उफनती लहरों ने भयावह रुप ले लिया है। जिससे हालात बिगड़ते जा रहे हैं। गंगा ने खतरे के निशान को पार कर लिया है। वाराणसी में पांच से छह सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है।
खतरे का निशान अब एक मीटर से भी कम की दूरी रह गया है। जिस रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है, शुक्रवार की सुबह तक खतरे का निशान भी पार कर लेने की आशंका है। वहीं बलिया में दो दिनों के घटाव के बाद बुधवार से गंगा का उफान तेजी से शुरु हो गया है।
गंगा एक बार फिर खतरा बिन्दु से 70 सेमी ऊपर पहुंच गई हैं। बैराजों द्वारा गंगा मे डिस्चार्ज किये गये पानी ने तटवर्तीय क्षेत्र के लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। गायघाट गेज पर गुरुवार सुबह 6 बजे गंगा का जलस्तर 58.310 मीटर रिकार्ड किया गया। गंगा का जलस्तर खतरे के बिंदू 57.615 मीटर से 70 सेंटीमीटर और मीडियम फ्लड 58.615 मीटर से मात्र 30 सेमी नीचे पहुंच गया है।
ऐसे में तटीय इलाकों में भय का माहौल है। रामगढ़ से लगायत लालगंज व नदी पार की पंचायत नौरंगा के लोगों में अफरा तफरी का माहौल है। इसमें सबसे ज्यादा बैरिया तहसील के लोग प्रभावित हैं। दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन ने गंगा, वरुणा व गोमती तटवर्ती इलाके के इलाकों व गांवों में अलर्ट घोषित कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में एसडीएम को तत्काल बाढ़ राहत इलाकों का दौरा करने का निर्देश दिया है।
वाराणसी में गंगा के पक्के घाट पानी में डूब गए हैं। कई जगह ढाब व गोमती के तटवर्ती इलाकों में स्थित सैकड़ों एकड़ फसलें डूब गई हैं। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के मुताबिक 20.05 लाख क्यूसेक पानी मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली एनसीआर के बांधों व बैराज से छोड़ा गया है। जो यमुना से होकर प्रयागराज पहुंचेगा। इससे प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ाव हो रहा है।
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