बलिया: इलाके में भूजल में मानक से अधिक आर्सेनिक पाए जाने के कारण गंगा का दोआब क्षेत्र के लोग स्वच्छ जल के लिए आज भी तरस रहे हैं। मजबूरन कई गांवों की आबादी आर्सेनिक से प्रदूषित जल पीने को बाध्य है। जिले में सर्वप्रथम बेलहरी विकास खंड के ग्राम पंचायत गंगापुर के चौबे छपरा पूरवे में सन 2000 में यादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता से आई टीम ने जलस्नोतों के जांच के बाद मानक से अधिक आर्सेनिक पाए जाने की पुष्टि की थी।
1उसके बाद पर्यावरणविद् व जल विशेषज्ञ डा. सुनिता नारायण की टीम, चंडीगढ़ मेडिकल कालेज से आए शोधार्थी छात्र-छात्रओं व कानपुर आइआइटी की टीम केंद्रीय जल संसाधन मंत्रलय व उत्तर प्रदेश जल निगम की टीम ने भी जांचोपरांत जलस्नोतों में मानक से अधिक आर्सेनिक पाए जाने की पुष्टि की।
इसके बाद शासन-प्रशासन कुछ सचेष्ट हुआ। जगह-जगह पानी टंकियां तो बनी, इंडिया मार्का हैंडपंप, डीप बोरिंग कराए गए किंतु कोई विशेष परिवर्तन नहीं हो सका। 1आर्सेनिक से अब तक तिवारी टोला निवासी सहादेव पाण्डेय (80), नंदलाल पाण्डेय (70), सोनामती (80) पत्नी शंभूनाथ तिवारी, दूधनाथ पाण्डेय (75), रामगढ़ निवासी बरमेश्वर गुप्ता (60), सोनिया देवी (32), गणोश ओझा (90), इंदू देवी (55), परशुराम कुंवर (75), सहित दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कई लोग आक्रांत होकर विभिन्न चिकित्सालयों में अपना इलाज करा रहे हैं किंतु कहीं भी इलाज कराने से कोई लाभ नहीं हो रहा है।
वहीं रमेश यादव (42) निवासी दुर्जनपुर, तारकेश्वर तिवारी (58) निवासी तिवारी टोला, ऊषा देवी (60) पत्नी सुधा यादव निवासी दुर्जनपुर आर्सेनिक से बुरी तरह प्रभावित हैं।जागरण संवाददाता, मझौवां (बलिया): क्षेत्र में भूजल में मानक से अधिक आर्सेनिक पाए जाने के कारण गंगा का दोआब क्षेत्र के लोग स्वच्छ जल के लिए आज भी तरस रहे हैं। मजबूरन कई गांवों की आबादी आर्सेनिक से प्रदूषित जल पीने को बाध्य है।
जिले में सर्वप्रथम बेलहरी विकास खंड के ग्राम पंचायत गंगापुर के चौबे छपरा पूरवे में सन 2000 में यादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता से आई टीम ने जलस्नोतों के जांच के बाद मानक से अधिक आर्सेनिक पाए जाने की पुष्टि की थी। 1उसके बाद पर्यावरणविद् व जल विशेषज्ञ डा. सुनिता नारायण की टीम, चंडीगढ़ मेडिकल कालेज से आए शोधार्थी छात्र-छात्रओं व कानपुर आइआइटी की टीम केंद्रीय जल संसाधन मंत्रलय व उत्तर प्रदेश जल निगम की टीम ने भी जांचोपरांत जलस्नोतों में मानक से अधिक आर्सेनिक पाए जाने की पुष्टि की। इसके बाद शासन-प्रशासन कुछ सचेष्ट हुआ।
जगह-जगह पानी टंकियां तो बनी, इंडिया मार्का हैंडपंप, डीप बोरिंग कराए गए किंतु कोई विशेष परिवर्तन नहीं हो सका। 1आर्सेनिक से अब तक तिवारी टोला निवासी सहादेव पाण्डेय (80), नंदलाल पाण्डेय (70), सोनामती (80) पत्नी शंभूनाथ तिवारी, दूधनाथ पाण्डेय (75), रामगढ़ निवासी बरमेश्वर गुप्ता (60), सोनिया देवी (32), गणोश ओझा (90), इंदू देवी (55), परशुराम कुंवर (75), सहित दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कई लोग आक्रांत होकर विभिन्न चिकित्सालयों में अपना इलाज करा रहे हैं किंतु कहीं भी इलाज कराने से कोई लाभ नहीं हो रहा है।
वहीं रमेश यादव (42) निवासी दुर्जनपुर, तारकेश्वर तिवारी (58) निवासी तिवारी टोला, ऊषा देवी (60) पत्नी सुधा यादव निवासी दुर्जनपुर आर्सेनिक से बुरी तरह प्रभावित हैं।लीवर की बीमारी से ग्रसित तारकेश्वर तिवारीचर्मरोग से पीड़ित रमेश यादव
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