बलिया में आर्सेनिक युक्त जल लोगों के शरीर में ज़हर घोल रहा है। नालों और हैंडपम्प में आने वाले आर्सेनिक युक्त पानी के उपयोग से लोगों में खतरनाक बीमारियां हो रही हैं। संक्रामक रोग से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
आर्थिक रूप से सक्षम लोगों ने घरों में आरओ फ़िल्टर लगवा रखे हैं, लेकिन कई लोग अभी भी आर्सेनिक युक्त गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी तरफ पानी बेचने का कारोबार भी काफी फल-फूल रहा है। मामूली पूंजी के सहारे बोरिंग कराकर प्लांट बैठाकर लोग धड़ल्ले से भूनिगत जल का दोहन कर रहे है। आश्चर्य की बात तो यह है कि ऐसे प्लांटों का ना तो कोई लाइसेंस है और ना ही कोई मानक।
इन बोरिंग पर जल निगम उदासीन बना हुआ है। भूमिगत जल का पूरी तरह दोहन हो रहा है और अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठें हैं। इसी उदासीनता से ज़िले में सैंकड़ों जल्द प्लांट खुल गए हैं जो भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में भूमिगत जल पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा।
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