बलिया। एक ओर जहां सुभासपा में इस्तीफों का दौर जारी है। शनिवार को भी खबर आई की फिर 25 से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दिया। तो वहीं दूसरी ओर सुभासपा का दावा है कि इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ता और नेता सुभासपा के थे ही नहीं इन्होंने ना तो कभी सुभासपा की सदस्यता ली और ना ही पार्टी में सक्रिय हुए। जब सुभासपा ज्वॉइन ही नहीं की तो इस्तीफा कैसे दे सकते हैं। अन्य पार्टियों सुभासपा की बदनाम करने की साजिश रच रही है।
बता दें शुक्रवार को 25 से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जिला स्थित डाक बंगला में सुभासपा की टोपी उतारकर जमीन पर रख दी। इस दौरान नेताओं ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर की बदलते विचारधारा से से आहत होकर सुभासपा छोड़ रहे हैं। वहीं सुभासप के नेता होने का दावा करने वाले पूर्व बसपा नेता बड़े लाल चौहान ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर दलितों को हिस्सा देने से पीछे हट रहे हैं। साथ ही ओम प्रकाश राजभर को एक अवसरवादी नेता भी बताया।
इधर सुभासपा के पदाधिकारी का कहना है कि जो लोग सुभासपा से इस्तीफा देने की बात कह रहे वो किसी सुभासपा नेता को इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे। इस तरह सुभासपा की टोपी उतारकर पार्टी छोड़ने की बात क्यों कर रहे हैं। ना तो वो पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की सूची उपलब्ध रहा है। तो यह साफ है कि जब ये सुभासपा में शामिल हुए ही नहीं तो अधिकारिक तौर पर इस्तीफा भी कैसे देंगे। अन्य पार्टी के नेता सुभासपा में इस्तीफा देने के लिए आ रहे हैं। यह सिर्फ सुभासपा को बदमान करने की साजिश है।
सालों पहले सुभासपा छोड़ी, अब दूसरी पार्टी में हैं इस्तीफा देने वाले कई नेता!
बड़े लाल चौहान- डेढ़ साल पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं वर्तमान में दूसरे दलों के साथ दिखते हैं।
मुश्ताक अहमद गुडू- विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी मालती राजभर के साथ वोट मांगते नजर आए।
हरिहर राजभर- फिलहाल भाजपा नेता हैं सुभासपा 3 साल पहले छोड़ दी थी।
जनार्दन राजभर – ये भी बसपा के नेता है सुभासपा का दामन 8 साल पहले छोड़ दिया था।
रमेश यादव- सपा नेता हैं 5 साल पहले सुभासपा छोड़ दी थी।
वहीं सुभासपा के संस्कृति प्रकोष्ठ के नेता उमाशंकर राजभर का आरोप है कि बड़े लाल राजभर के कहने पर वह सांकृतिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे लेकिन मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया।
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