बलिया डेस्क : बलिया में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना में बड़ी धांधली का मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर जिलाधिकारी श्रीहरिप्रताप शाही ने जांच का आदेश दिया था जिसमे अब पता चला है कि जिले में तैनात 16 बीपीएम के मानदेय के भुगतान के नाम शासकीय धन का बंदरबांट हुआ. जांच में लगभग 13 लाख 63 हजार 472 रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई है.
जांच अधिकारीयों ने गहनता से जांच करने के बाद अपनी रिपोट उच्चाधिकारियों को भेज दी है और जिलाधिकारी से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कारवाई करने की सिफारिश की है. दरअसल मार्च और एक बार फिर अप्रैल महीने में ही हरेंद्र नाथ तिवारी और डीसीपीएम पुष्पेंद्र सिंह शाक्य ने विभाग के आला अधिकारीयों के साथ साथ जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था.
इसमें उन्होंने एन एच एम के डी पी एम की तरफ से मनमाने तरीके से बी पी एम के मानदेय में इजाफा करने और उससे होने वाले राजस्व की शिकायत की थी. शिकायती पत्र को जिलाधिकारी ने संज्ञान में लिया और जांच का निर्देश दिया. जांच कोषाधिकारी ममता सिंह ने की. जांच में पाया गया कि इस मामले में 13 लाख 63 हजार 472 रुपए की धांधली हुई.
इसकी रिपोर्ट कोषाधिकारी ममता सिंह ने जिलाधिकारी को 6 जून को सौंपी. रिपोर्ट में कहा गया कि अगस्त 2018 में बीपीएम का समायोजन ख24255 प्रति माह के नियत मानदेय पर हुआ था. पर शासन या फिर जिला स्वास्थ्य समिति की अनुति के बिना डीपीएम की तरफ से अचानक बीपीएम के मानदेय को बढ़ाकर 32064 रुपये करने से करीब 13 लाख 63 हजार 472 रुपए की बदंरबांट हुआ.
वहीँ इस मामले में डीपीएम आरपी यादव का कहना है कि बीपीएम का मानदेय मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय की तरफ से बनाया जाता है. आरपी यादव ने आगे कहा है कि उनका इससे कोई लेना देना नहीं है.
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