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अमेरिका-चीन चांद तक 4 दिन में पहुंचे, चंद्रयान 2 को क्यों लगेंगे 48 दिन, ये है असली वजह…

हेलो दोस्तों, जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि भारत chandrayaan-2 को चांद पर भेज रहा है । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के वैज्ञानिकों ने अपने दूसरे मून मिशन “चंद्रयान -2” को पृथ्वी की कक्षा में आगे बढ़ाना शुरू भी कर दिया है ।

दोस्तों बहुत सारे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि जब अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश अपने यान 3 से 4 दिन में चांद तक पहुंचा सकते हैं तो भारत इस काम में 48 दिन का समय क्यों ले रहा है ? और दूसरा सवाल यह भी मन में आता होगा कि भारत chandrayaan-2 को सीधा चांद पर ही क्यों नहीं उतार रहा है ? इतने चक्कर लगाने की क्या ज़रूरत है? तो दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं इन्हीं सारे सवालों के जवाब।

जब वैज्ञानिक chandrayaan-2 सीधे चंद्रमा पर उतार सकते थे तो वे इस यान को इतना घुमा क्यों रहे हैं ? दोस्तों यह सवाल जब हमने ISRO के पूर्व वैज्ञानिक विनोद कुमार से पूछा तो उन्होंने बताया कि अमेरिका ,रूस और चाइना की तरह भारत भी chandrayaan-2 को सीधा चांद पर भेज सकता था लेकिन ऐसा करने के लिए भारत को ज्यादा ताकतवर रॉकेट की जरूरत पड़ती । सिर्फ इतना ही नहीं रॉकेट में अधिक इंजन की जरूरत भी होती जिसके लिए हमें रॉकेट का आकार बढ़ाना पड़ता । उन्होंने कहा कि हम chandrayaan-2 की पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर इसलिए लगवा रहे हैं ताकि चांद पृथ्वी के और करीब आ जाए । जिस समय chandrayaan-2 पृथ्वी के पास चक्कर लगाएगा वह चांद के बहुत करीब पहुंच जाएगा फिर वह चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण अपने आप चांद की तरफ खीच जाएगा और तब ISRO के वैज्ञानिक इसकी गति को नियंत्रित करके इसे चांद पर उतारेंगे ।

आइए दोस्तों अब हम आपको बताते हैं chandrayaan-2 की यात्रा के विभिन्न पड़ाव क्या क्या होंगे ?
Chandrayaan-2, 22 जुलाई से लेकर 6 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। फिर उसके बाद 14 अगस्त से 20 अगस्त तक वह चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा से यात्रा करेगा । 20 अगस्त को चंद्रयान चांद की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा और 31 अगस्त तक वह चांद की कक्षा में चक्कर लगाएगा। 1 सितंबर को विक्रम लेंडर ऑर्बिटल से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा । 5 दिन की यात्रा के बाद विक्रम लेंडर 6 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कर जाएगा लैंड करने के 4 घंटे के बाद रोवर प्रज्ञा लैंडर से निकल कर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करेगा।

दोस्तों इस से साफ पता चलता है कि भारत भी chandrayaan-2 को सीधा चांद पर उतार सकता था लेकिन इस सब में काफी सारा इंधन ,मेहनत और तकनीक की जरूरत पड़ती । इसीलिए इसरो के वैज्ञानिक इस इंतजार में हैं कि चांद पृथ्वी के नजदीक आ जाए तब chandrayaan-2 को चांद पर उतारा जाए ऐसा करने से भारत कम खर्चे में अपने बड़े मिशन को अंजाम दे सकता है।

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