अखिलेश यादव का बलिया दौरा, सनातन पांडेय, रमाशंकर राजभर के लिए क्या समीकरण बदलेंगे?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से लोकसभा उम्मीदवार अखिलेश यादव के बलिया दौरे की तैयारी शुरू हो गई है. 25 मई को सपा प्रमुख बलिया के फेफना में जनसभा को संबोधित करेंगे. यहां बलिया लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय के पक्ष में समर्थन की अपील करेंगे. जनसभा में सलेमपुर से पार्टी के प्रत्याशी रमाशंकर राजभर भी मौजूद रहेंगे.

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में 1 जून को बलिया और सलेमपुर में मतदान होगा. मतदान से करीब हफ़्ते भर पहले अखिलेश यादव की चुनावी रैली न सिर्फ बलिया और सलेमपुर बल्कि पूरे पूर्वांचल के लिहाज से ख़ास माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अखिलेश यादव की रैली से इन सीटों पर सपा उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनेगा और पार्टी के कोर वोटर्स का उत्साह बढ़ेगा.

अखिलेश यादव लगातार अपनी रैलियों में केंद्र की बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं. भीषण गर्मी के बीच सभी पार्टियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने वोटर्स को बूथ तक पहुंचाना है. पार्टियां इस जुगत में लगी हैं कि किसी भी हाल में उनके वोटर पोलिंग बूथ तक जाएं और वोट डालें.

बीते चरणों की वोटिंग में मतदान प्रतिशत कम होने में तपती गर्मी को भी एक वजह माना जा रहा है. ऐसे में पार्टी के सबसे बड़े नेता की रैली से वोटर्स तक एक ख़ास अपील पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है.

बात करें बलिया सीट की तो यहां से सनातन पांडेय के सामने बीजेपी के नीरज शेखर मैदान में हैं. स्थानीय स्तर पर पार्टी नेताओं की गुटबंदी नीरज शेखर को नुकसान पहुंचा सकती है. इस बीच भृगु बाबा के जयकारे पर शेखर के बयान से जो विवाद जन्मा उसने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय और उनके समर्थकों ने इस मौके का ख़ूब फायदा उठाया है. हर नुक्कड़ सभा में ये मुद्दा उठाकर नीरज शेखर पर निशाना साधा जा रहा है. देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी सुप्रीमो अपनी रैली में भी इस हवाले से बीजेपी को घेरते हैं या नहीं.

एक दिलचस्प बात ये भी है कि नीरज शेखर पहले समाजवादी पार्टी के नेता रहे हैं. अखिलेश यादव से उनके अच्छे संबंध थे. लेकिन दावा किया जाता है कि बलिया लोकसभा से 2019 के आम चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी.

दूसरी ओर सलेमपुर में सपा को जीत दिलाने का जिम्मा रमाशंकर राजभर के कंधों पर है. राजभर के सामने बीजेपी के रवींद्र कुशवाहा की चुनौती है. कुशवाहा इस सीट से बीजेपी के सीटिंग सांसद हैं. लेकिन इस क्षेत्र में उनके खिलाफ जनता में नाराज़गी देखने को मिली है. कई मौकों पर देखा गया कि गांव के लोगों ने कुशवाहा के सामने ही विरोध दर्ज कराया. ऐसे में ये सीट भी बीजेपी के लिए सिरदर्द है. लेकिन इसका फायदा सपा प्रत्याशी कितना उठा पाएंगे, ये देखने वाली बात होगी.

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