बलिया। बारिश के बाद अब बाढ़ और जलजमाव से लोग परेशान हैं। कई गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। शहर के स्टेडियम, पुलिस लाइन, काजीपुरा, एससी कॉलेज चौराहा आदि इलाकों में पानी भरा हुआ है। मोहल्लों में जलजमाव के कारण शहर के लोगों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। सप्ताह भर पहले हुई जमकर बारिश का असर अभी भी दिखाई पड़ रहा है। जलभराव की वजह से आधा दर्जन मोहल्लों में अब बीमारी का खतरा बढ़ गया है। उमरगंज समेत कई मोहल्लों में अभी भी पानी भरा हुआ है। यहां लोग ट्यूब का सहारा लेकर बाजार जाने को विवश हैं। समस्या विकराल है लेकिन कोई ध्यान नहीं है। इस दिशा में प्रशासन को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
712 हेक्टेयर का फसल नुकसान- गंगा और सरयू नदी के बाढ़ से प्रभावित जिले में 69 गांव ऐसे हैं, जहां 33 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। सभी क्षेत्रों का सर्वे करने के बाद जिला प्रशासन ने यह रिपोर्ट प्रस्तुत किया है। कुल 1723 किसानों की 712 हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसल नष्ट हुई है। अपर जिलाधिकारी रामआसरे ने बताया कि सदर तहसील के 54 गांवों के 1236 किसान व 263 हेक्टेयर भूमि, बैरिया के दो गांवों के 54 किसान व 24 हेक्टेयर भूमि तथा बांसडीह तहसील के 13 गांव के 433 किसान व 424 हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है।
सुरहा ताल के पानी ने मचाई तबाही- जिले की सबसे बड़ी झील सुरहाताल के इलाके में सैकड़ों लोगों की पानी में ही जिदगानी है। यह ताल 24.9 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। दहमुडियारी ताल का क्षेत्रफल 287.69 हेक्टेयर है। कोइली मोहान ताल का क्षेत्रफल 270 हेक्टेयर है। भोइया-मझौली ताल का क्षेत्रफल 190 हेक्टेयर है। रेवती दहताल का क्षेत्रफल 120 हेक्टेयर है। वहीं जयप्रकाशनगर में भागड़ नाला से भी लगभग 15 किमी से फैला हुआ है। जनपद में अभी भी लगभग 5000 एकड़ खेत जलजमाव के कारण प्रभावित हैं। इसके कारण किसान उसमें रबी की खेती नहीं कर पाएंगे। सुरहाताल कटहल नाले के साथ गंगा नदी से जुड़ा हुआ है।
जलजमाव से जनता परेशान- सुरहाताल के कारण सूर्यपुरा-शिवपुर पिच मार्ग पर दो फीट तक पानी लग जाने से सड़क पर बड़े छोटे वाहनों का आवागमन बंद हो गया। छात्र-छात्राओं या राहगीरों को 15 किलोमीटर ज्यादा दूरी तय कर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। पीड़ित दशरथ विद, भजन कश्यप, लक्ष्मण पासवान, सीताराम, डब्लू विद, धर्मेन्द्र कश्यप, मनई राम आदि लोगों ने बताया कि इस समय घरों में जहरीले जीव जंतु भी आ गए हैं।
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