बलिया में जिला अस्पताल के बाद अब रसड़ा सीएचसी में भी सीजेरियन (ऑपरेशन) से डिलेवरी की शुरुआत हो गई है। जहां आज पहली सिजेरियन डिलीवरी कराई गई। सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती भी हो गई है। इस मौके पर बलिया की जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी को हम प्रतिबद्ध हैं। वहीं सीजेरियन डिलेवरी की व्यवस्था शुरू होने से अब लोगों को काफी लाभ मिलेगा। उन्हें किसी निजी अस्पताल में जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
रसड़ा के अमहरपट्टी उत्तर गांव के दिलीप कुमार ने अपनी पत्नी नीलम को प्रसव पीड़ा होने पर सुबह 3 बजे सीएचसी में भर्ती कराया। यहां सामान्य डिलेवरी की कोशिश की गई लेकिन नहीं हो सकी। ऐसे में डॉक्टरों ने उन्हें सीजेरियन प्रसव की सलाह दी। इसके बाद ऑपरेशन कक्ष में पूरी व्यवस्था करके स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष जायसवाल, बेहोशी (निश्चेतक) चिकित्सक डॉ. विनोद कुशवाहा ने ओटीए शिवजी गुप्ता के साथ नीलम का सीजेरियन के जरिए डिलीवरी कराई। नीलम ने बेटी को जन्म दिया, जिसका वजन 3.700 किलो था। ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य हैं। उन्हें वार्ड में भर्ती कराया गया है।
सीएचसी के अधीक्षक डॉ. बीपी यादव ने बताया कि ऐसी पहल शासन के निर्देश पर हुई है। इसके लिए यहां के सीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ और बेहोशी के चिकित्सक के साथ ही ओटीए की तैनाती कुछ दिनों पहले की गई है। अब सीजेरियन प्रसव के लिए प्रसुताओं को कहीं अन्यत्र निजी अस्पतालों में या हायर सेंटर जाना नहीं पड़ेगा। रसड़ा के इतिहास में सरकारी अस्पताल में पहली बार सीजेरियन के जरिए पैदाइश हुई है।
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