बलिया डेस्क: आधुनिकता की दौड़ में बेतहाशा भागती जिस जिंदगी को हम तरक्की के फलसफे का नाम दे रहे हैं, वह हकीकत में मानवता को कुचले जा रही है। मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। इसका जीता जागता उदाहरण रविवार को देखने को मिला,
जब जिले दुर्घटनाग्रस्त बाइक सवार बुजुर्ग घंटों तक ओवरब्रिज पर तड़पते रहे, लेकिन प्रशासन या फिर किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जहमत तक नहीं उठाई। जबकि पास ही महज 50 मीटर की दूरी पर सिविल लाइन पुलिस चौकी मौजूद था।
दरअसल हुआ ये कि सोबईबांध सुखपुरा निवासी दयानंद तिवारी (70 साल) अपनी पत्नी कमलावती (65 साल) के साथ शहर के अधिवक्ता नगर में रहते थे। गुरुवार की दोपहर दयानंद अपनी पत्नी के कमलावती के साथ बाइक से किसी कार्य से शहर के ओवरब्रिज से गुजर रहे थे तभी अचानक एक बोलेरो ने उनके बाइक में जोरदार टक्कर मार दिया।
जिससे उनकी पत्नी ओवरब्रिज से नीचे गिरकर तुरंत दम तोड़ दिया। वही, पति दयानंद तिवारी की बोलेरो से ही कुचलकर मौके पर ही मौत हो गई। शायद पति की जान बच सकती थी यदि समय से उसे अगर कोई अस्पताल पहुंचा देता, लेकिन किसी ने यह जहमत नहीं उठाई।
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