बलिया में कोर्ट के आदेश के बाद तहसीलदार, लेखपाल समेत 5 खोलों पर धोखाधड़ी, जालसाज़ी और अन्य धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक़, मामला सुखपुरा में हुए विवाद में ग़लत आख्या लगाने के आरोप से संबंधित है।
सुखपुरा निवासी शेषनाथ राम ने न्यायालय स्पेशल कोर्ट एससी-एसटी एक्ट में वाद दाखिल कर गुहार लगाई थी कि बीते वर्ष उनका उनके पड़ोसी दिलीप गुप्ता के परिवार से विवाद हुआ था। जिसमें उन लोगों द्वारा घर में घुसकर मारपीट की गई थी। मुकदमे में विवेचक द्वारा मांग करने पर मेरे द्वारा अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया गया था। इसके बावजूद काफी समय बीत जाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी जानकारी ली गई।
इसके बाद पता चला कि मुक़दमे के विवेचक ने बांसडीह तहसीलदार को फरियादी का जाति प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए भेजा। इसकी आख्या में तहसीलदार निखिल शुक्ला द्वारा अभियुक्तों को बचाने के लिए दस्तावेजों में कूटरचना करके मुझे पिछड़ी जाति का बताया गया है। बाद में पता चला कि वर्तमान लेखपाल ओमजी गुप्ता मेरे मुकदमे के अभियुक्त के रिश्तेदार हैं। जिनके द्वारा ही छल प्रपंच कर तहसीलदार आदि को प्रभाव में लेकर गलत रिपोर्ट लगाई गई है। इसकी शिकायत करने पर फरियादी के साथ मारपीट की गई।
कोतवाल संजय सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर तहसीलदार व लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है। तहसीलदार निखिल शुक्ला ने कहा उक्त मुकदमा व उसका आदेश दोनों एकपक्षीय, गलत व विधि विरुद्ध है। इस संबंध में उच्च न्यायालय में अपील की गई है। प्रकरण में पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी की गई है। जिसका न्यायालय में इनको जवाब देना होगा।
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