बलिया जनपद के 33 आवेदकों में से 17 पात्र सरकारी कर्मिकों के परिजनों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीस-तीस लाख रुपए मुआवजा दिया गया है। (फोटो साभार: इंडिया टूडे)
बलिया जनपद के 17 सरकारी कर्मिकों के परिजनों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीस-तीस लाख रुपए दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान इन सरकारी कर्मचारियों की कोरोना से निधन हो गई थी। जिनके परिवार वालों को तीस लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। पूरे जिले से कुल 33 कर्मिकों ने इस मुआवजे के लिए आवेदन किया था।
बलिया जनपद से किए गए 33 आवेदनों में से 17 ही पात्रता सूची में आ सके। शेष 16 आवेदन उत्तर प्रदेश सरकार के पैमाने पर अपात्र पाए गए। पात्र कर्मिकों के परिजनों को सरकार की ओर से तीस-तीस लाख रुपए का चेक प्रदान किया गया। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग के चौदह, ग्राम्य विकास विभाग से एक, वन विभाग से एक और सहकारिता विभाग से एक कर्मचारी शामिल थे।
बेसिक शिक्षा विभाग के दिनेश कुमार सिंह, भोलानाथ यादव, अंतिम कुमारी मिश्रा, आशा देवी, महेश उपाध्याय, स्वास्तिका मिश्रा, विजय प्रताप सिंह, विवेकानंद वर्मा, राकेश कुमार, शंभुनाथ, रियाज अहमद, रिजवान अहमद, दिनेश कुमार शर्मा, लालमोहन सिंह यादव के परिजनों को तीस-तीस लाख रुपए दिए गए। इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग से मनोज कुमार सिंह, वन विभाग से राजकिशोर राम, सहकारिता विभाग से सरोज कुमार यादव के परिवार को भी तीस-तीस लाख रुपए का चेक दिया गया।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तब संपन्न कराए गए जब पूरे देश में कोरोना का कहर देखने को मिल रहा था। उत्तर प्रदेश भी कोरोना संक्रमण से अछूत नहीं था। आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। इस तरह कोरोना का खतरा प्रदेश में सबसे ज्यादा थी। पंचायत चुनाव का तब जमकर विरोध भी हुआ। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने चुनाव कराने का फैसला किया।
चुनाव में सरकारी कर्मिकों की चिंता सबसे अधिक थी। क्योंकि चुनाव की ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण होने की पूरी संभावना थी। हुआ भी यही। चुनाव के दौरान बड़ी संख्य में शिक्षक और अन्य कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ गए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने चुनाव के दौरान कोरोना से जान गंवाने वाले कर्मिकों को मुआवजा देने का ऐलान किया था। सरकार ने मुआवजे की राशि सितंबर के अंत में भेजा था। जिसे बीते सोमवार को जिले के पात्र कर्मिकों को प्रदान किया गया। सहायक चुनाव अधिकारी बेचू राम ने मीडिया में बयान दिया है कि “चुनाव में ड्यूटी के दौरान कर्मिकों की मौत के बाद उनके आश्रित और वारिसान के खाते में 30-30 लाख रुपए भेज दिया गया है। इसमें कुल 33 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें से 17 लोग जांच में सही पाए गए थे। शेष अपात्र पाए गए थे।”
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