परिजनों ने बताया कि छठ पूजा के तैयारी के दौरान दोनों को करंट लगा था जिसके बाद दोनों को जिला अस्पताल लाया गया जहां उनकी सांस चल रही थी लेकिन यहां पर कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था. सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे इमरजेंसी सेवाएं चल रही थीं. जब तक डॉक्टर आए तब तक दोनों ने दम तोड़ दिया. इसके बाद ग्रामीणों ने बलिया जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जमकर तोड़फोड़ की और कई दरवाजों के शीशे तोड़ डाले.
तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद रसड़ा की राजनीतिक तस्वीर बदल…
फेफना विधानसभा सीट पर 2027 को लेकर जनता का मूड क्या है? विधायक संग्राम सिंह…
सिकंदरपुर विधानसभा में 2027 की तैयारी शुरू हो चुकी है। विधायक जियाउद्दीन रिजवी के कार्यकाल…
बेल्थरा रोड (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर 2027 का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। विधायक हंसू…
बैरिया विधानसभा में 2027 को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। विधायक जय प्रकाश अञ्चल…
बांसडीह की राजनीति हमेशा से बलिया की सबसे चर्चित सियासी ज़मीन रही है। 2027 से…