बलिया। ”गरीबी से दम तोड़ता बलिया का यह परिवार, 4 बच्चों के साथ फांकाकशी करने को मजबूर” शीर्षक के नाम से 14 सितम्बर 2018 को बलिया खबर न्यूज पोर्टल में खबर चलने के बाद इसका असर हुआ कि प्रशासनिक अधिकारियों सहित सामाजिक लोगों ने गरीबी व भूख से तड़प रही क्षेत्र के घाटमपुर निवासी नवालिक चार बच्चों की माँ सावित्री देवी पत्नी जीतन राजभर का हाल-चाल लेने एवं मदद के लिए आगे आए।
बलिया खबर ने समाचार को सबसे पहले लाया। जिसके असर से तहसीलदार बाँसडीह पंडित शिवसागर दुबे ने मनियर कस्बे के लेखपाल राजेश राम को पीड़ित परिवार का न सिर्फ मौका मुआयना करने के लिए भेजा बल्कि स्वयं मनियर पहुंचकर आदर्श नगर पंचायत मनियर के कार्यालय में प्रमुख प्रतिनिधि कन्हैया सिंह से आवास उपलब्ध कराने व कोटेदार सुशीला सिंह को एक क्विंटल चावल व एक क्विंटल तत्काल पहुंचाने को कहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर साहब उद्दीन ने एक स्वास्थ्य टीम
भेजकर पीड़ित परिवार परिवार का उपचार करने के लिए भेजा।
बाल विकास एवं पुष्टाहार परियोजना के कार्य करती के तरफ से पीड़ित परिवार के बच्चों के लिए पंजीरी भी दिया गया। सबसे पहले उस महिला की सेवा में प्रज्ञा पब्लिक स्कूल घाटमपुर मनियर के प्रबंधक पराशर मुनि पाल ने 25 किलोग्राम आटा भेजवा कर उदारता का परिचय दिया। तत्पश्चात सोमवार के दिन मनियर चेयरमैन भीम गुप्ता ने 50 किलो चावल, 50 किलोग्राम गेहूं, के पैकेट सहित दाल बिस्कुट सरसों के तेल नामक दिया सलाई सब्जी मसाला इत्यादि सामग्रियों की सहित 11 सो रुपए की आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को प्रदान की।
तहसीलदार पंडित शिवसागर दुबे ने पत्रकारों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि मीडिया की कलम की धार निकाल के काल के गाल में समाहीत होने जा रहे एक परिवार को बचा लिया। मीडिया बधाई के पात्र है उच्च अधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल राहत उपलब्ध तो करा दिए लेकिन सूचना के 72 घंटे के बाद भी विकासखंड मनियर के कोई भी कर्मचारी ग्राम पंचायत समिति के अध्यक्ष व सचिव तथा क्षेत्रीय लेखपाल सहित कोई कर्मचारी उस पीड़ित महिला की सुधि लेने की जहमत नहीं उठाई ऐसे कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को क्षेत्रीय लोग नाखुश रहे। जब खंड विकास अधिकारी मनियर नंदलाल से पूछा गया कि सूचना के 72 घंटे बितने के बाद भी अाप का कोई अधिकारी व कर्मचारियों ने पीड़िता सुधि नहीं ली। जिसपर उन्होने कहा कि सचिव मौके पर जाएंगे और जो भी विकासखंड के तरफ से पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध हो सकती है वह कराई जाएगी।
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