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मोदी सरकार के मंत्री एमजे अकबर ने दिया इस्तीफा, #MeToo मूवमेंट ने दिखाया असर

नई दिल्ली: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। #MeToo कैम्पेन के तहत करीब 20 महिला पत्रकारों ने एम जे अकबर पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं।

अकबर ने लिखित बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि नैतिक आधार पर उन्होंने इस्तीफा दिया है। हालांकि अकबर ने मामले में अदालती कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

ऐसा माना जा रहा है कि कल अजीत डोभाल और अमित शाह से मुलाकात में ही एमजे अकबर से इस्तीफा देने को कह दिया गया था। अकबर के पास पद त्याग के सिवा राजनीतिक तौर पर कोई चारा नहीं था।

हालांकि एक बार फिर अकबर ने खुद के ऊपर लगे आरोपों को नकारा है। उन्होंने साफ कहा कि वे आरोप लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ अदालत में लड़ाई लड़ेंगे।

कांग्रेस पार्टी ने इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब पहली महिला ने आरोप लगाया था तभी अकबर को इस्तीफा दे दिया जाना चाहिए था।

वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने भरसक प्रयास किया कि अकबर को बचाया। कांग्रेस ने इसे महिला शक्ति #MeToo अभियान की जीत बताई है। कांग्रेस ने एमजे अकबर के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है।

वहीं वामदलों ने यौन शोषण के आरोपों में घिरे विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर के मंत्रिपरिषद से इस्तीफे को महिलाओं के शोषण के खिलाफ सोशल मीडिया पर शुरु की गयी ‘मी टू’ मुहिम की कामयाबी बताया। भाकपा के महासचिव सुधाकर रेड्डी ने बुधवार को अकबर के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा ‘‘मुझे लगता है कि जिस तरह से ‘मी टू’ मुहिम देश में जोर पकड़ रही है, उसे देख कर मोदी सरकार अकबर से इस्तीफा लेने पर मजबूर हुयी है।” रेड्डी ने इसे मी टू मुहिम की कामयाबी बताते हुये कहा कि अकबर को उसी दिन त्यागपत्र दे देना चाहिये था जब उनकी पूर्व महिला सहयोगियों ने उनके खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाये थे।

माकपा की महिला इकाई की महासचिव मरियम धावले ने कहा कि अकबर का इस्तीफा उन सभी महिला संगठनों की जीत है जिन्होंने महिला पत्रकारों द्वारा केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ आरोप लगने के बाद उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाने के लिये आंदोलन तेज किया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में महिलाओं के आंदोलन की वजह से मोदी सरकार ने मजबूर होकर अकबर से इस्तीफा देने को कहा है।

बलिया ख़बर

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