बलिया- जिला अस्पताल में एक महीने से बंद है एक्स-रे, मेडिकोलीगल के लिए मरीज लगा रहे वाराणसी की दौड़

बलिया जिला अस्पताल के एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट के इस्तीफा देने के बाद पूरे हॉस्पिटल की व्यवस्थाएं चरमरा गई है। कई दिनों से एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड बंद है। इससे मरीजों को निजी क्लीनिकों पर मोटे दाम देकर टेस्ट कराने पड़ रहे हैं।वहीं मेडीकोलीगल कराने के लिए लोग वाराणसी की दौड़ लगा रहे हैं। दरअसल मारपीट के मामले में बिना मेडिकोलीगल करे केस दर्ज नहीं होता और एक्स-रे रिपोर्ट में जाहिर होने वाली चोट के आधार पर ही मुकदमों की विवेचना होती है।

मारपीट से जुड़े मामलों में संबंधित थाने की पुलिस लिखा-पढ़ी करने के बाद एक्स-रे करवाती है, जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे के आधार पर रिपोर्ट लगाता है। जिसके बाद ही मामला दर्ज होता है।लेकिन बलिया जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से एक्स-रे बंद है। जिसके कारण मेडीकोलीगल वाले लोगों को आजमगढ़ और बनारस रेफर किया जा रहा है। इसमें ज्यादा समय खर्च होने के साथ ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ पर लोगों पर पड़ रहा है।

सीएमएस डॉ. दिवाकर सिंह ने कहा कि अस्पताल में महंगा और सबसे अच्छा डिजिटल एक्स-रे हो रहा है। मेडिकोलीगल केसों में रेडियो लाजिस्ट के न होने के कारण बाहर भेजना हमारी मजबूरी है। शासन को रेडियोलाजिस्ट और न्यूरोलाजिस्ट के लिए लिखा गया है लेकिन किसी की तैनाती नहीं हुई। बता दें कि अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे डा.संजय सिंह जिला अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का आवेदन सीएमएस डा.विनोद सिंह सौंपा था। जिसके बाद से ही अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है। वहीं महिला चिकित्सालय की बात करें तो यहां पिछले 3 सालों से अल्ट्रासाउंड की जांच बंद है।

अस्पताल में तैनात चिकित्सकों को इमरजेंसी के लिए अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग दी गई है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है।महिला चिकित्सालय में प्रतिदिन करीब 400 मरीज आते हैं इनमें से 60 से 100 मरीजों को अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी जाती है। लेकिन अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की कोई व्यवस्था न होने के चलते मरीज प्राइवेट क्लीनिकों के चक्कर लगाते हैं और मंहगे खर्च पर जांच करवाते हैं। जिला अस्पताल में आला अधिकारियों, मंत्री, विधायक, सांसद के समय समय पर निरीक्षण के बावजूद भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई, जिसके कारण मरीज परेशान हैं।

Rashi Srivastav

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